नाम के लेल लागू होई छई योजना

redoसरकार त हजारों तरह के योजना लागू करई छथिन। जेइमें ज्यादातर सुविधा महादलित अउर अनुसुचित जाति के देई छथिन। लेकिन योजना के लाभ केतना लोग के मिल पवई छई?
जइसे हाल ही में नवम्बर 2013 में बिहार सरकार महादलित परिवार के रेडियो देलथिन कि उहो परिवार के लोग सब शहर अउर राज्य के समाचार सुनथिन। रेडियो त वितरण कलथिन लेकिन देखे के समाज में मिल रहल हई कि कोनो एक गांव में पंद्रह से बीस लोग के मिललई त कोनो गांव के सुची में नामें न हई। जेई कारण आधा से कम लोग के रेडियो मिललई, आधा से अधिक लोग रेडियो के राहे देख ई छथिन। जेकरा मिललई उहो सही उपयोग न करई छथिन। ज्यादातर लोग गाना, निर्गुन सुनई छथिन। जहां बच्चा स्कूल से भाग अवई छई अउर घर पर आके रेडियो पर गाना सुनई छई। केतना त प्रखण्डसे निकलते सौ डेढ़ सौ में बेच लेलथिन। त इ योजना लागू करे से कतेक लाभ हई। इ योजना देश के भविष्य बनावे वाला हई कि भविष्य खराब करे वाला? इ सब देखे से मालूम परई छई कि सब योजना लागू करे के पिछे अपन स्वार्थ भी छुपल रहई छई। योजना त लागू हो गेल लाभ मिले चाहे न मिले। सही उपयोग हो रहल हई कि न एई पर सरकार के ध्यान न हई।