धार्मिक राजनीति का हिस्सा तो नहीं यह बलात्कार?

mantaकलकत्ता। राज्य के नदिया जिले में एक स्कूल में काम करने वाली ईसाई नन के साथ 13 मार्च को हुआ सामूहिक बलात्कार का मामला गरमाता जा रहा है।
पश्चिम बंगाल के अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष प्रोफेसर मारिया फर्नांडिज ने जिले में रंगघाट स्थित स्कूल का दौरा 18 मार्च को किया। उन्होंने घटना वाली जगह की गहरी छानबीन करने के साथ लोगों से भी बात की। फर्नांडिज ने बताया कि घटनास्थल के हालात बता रहे थे कि वहां हमला करने वाले लोग किसी खास धर्म के थे। उन्हें संदेह है कि यह मामला ’घर वापसी‘ या फिर ’धर्म परिवर्तन‘ अभियान से भी जुड़ा हो सकता है। हालांकि पुुलिस लगातार यह फैलाने की कोशिश कर रही है कि यह मामला डकैती का है। लेकिन घटना के समय मौजूद नन की सहयोगियों ने बताया कि चोरी में गए सामान और नकदी की कीमत एक लाख से भी कम है। पुलिस इस डकैती को बारह लाख का बता रही है। दूसरी बात यहां के धार्मिक स्थल में हमलावरों ने अपने चप्पल फेंक कर मारे। धार्मिक स्थल को तहस नहस कर दिया। मूर्ति को तोड़ दिया। यह सब देखने के बाद संदेह होता है कि कहीं यह मामला धार्मिक राजनीति का तो नहीं है?
मौके पर मौजूद स्कूल के एक पूर्व छात्र ने कहा कि मुख्यमंत्री भी कह रही हैं कि यह मामला राजनीतिक साजिश का है। लेकिन वह यह नहीं बता रही हैं कि अभी तक अपराधी क्यों नहीं पकड़े गए? आरोपियों की तस्वीरें भी सी.सी.टी.वी. में हैं। लेकिन एक भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी, क्यों? उलटे सरकार कह रही है कि अपराधी कलकत्ता की सीमा लांघ कर बांग्लादेश चले गए हैं।

एक और मामला

पश्चिम बंगाल में बर्धमान जिले के कटवा गांव में पचहत्तर साल की एक महिला की लाश मिली है। इस महिला के साथ बलात्कार कर उसे मारकर फेंक दिया गया था। पुलिस ने अभी तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।