दो कलाकार जो नहीं रहे, पर ज़िंदा रहेगी उनकी कला

एक ही हफ्ते में देश के दो बड़े और पुराने कलाकार चल बसे। नेक चंद सैनी और चाल्र्स कोरिया – दोनों की कला अलग और खास थी।
नेक चंद ने कभी कला सीखी नहीं थी, बस पुराने फिंके सामान से खूबसूरत मूर्तिया बना डालीं।
चाल्र्स कोरिया सिर्फ इमारतें नहीं बनाते थे, कला की दुनिया के क्रांतिकारी थे जिन्होंने आलीशान बंगले बनाए पर गरीबों की ज़्ारूरतों का ध्यान रखते हुए किफायती इमारतें भी बनाईं।

17-06-15 Mano - Nek Chand (youtube)चंडीगढ़। 12 जून को देश के जाने माने कलाकार नेक चंद सैनी चल बसे। नेक चंद नब्बे साल के थे। उनकी बनाई हुई सबसे मशहूर जगह है ‘राॅक गार्डन।’

चंडीगढ़ शहर में बना ये बगीचा खूबसूरत मूर्तियों से भरा हुआ है। आज दुनिया के कोने कोने से लोग इसे देखने आते हैं। 1987 में नेक चंद जब चंडीगढ़ के लोक कल्याण विभाग में काम करते थे तब से वे इन मूर्तियों के निर्माण में लगे हुए थे। सभी मूर्तियां ज़्यादातर ऐसे सामान से बनी हैं जो बेकार हो चुका था और नेक चंद ने अलग-अलग इमारतों और फैक्ट्रियों के आसपास से जमा की थीं।

नेक चंद ने अपनी इस कला को सुरक्षित रखने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। नेक चंद सैनी ने अपने खाली समय में इन मूर्तियों को बनाना शुरू किया था। सुकना सरोवर के पास जिस ज़्ामीन पर उन्होंने काम शुरू किया वो सरकारी थी इसलिए कई सालों तक उन्हें राॅक गार्डन को बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ा था। अंत में खुद चंडीगढ़ के लोगों ने उनका सहयोग किया।

आज उनके नाम पर एक संस्था इंग्लैंड की राजधानी लंदन में भी है और राॅक गार्डन में रोज़्ा पांच हज़्ाार लोग उनकी कला देखने आते हैं।

(फोटो साभार: विकिपीडिया)
(फोटो साभार: विकिपीडिया)

गरीबों के लिए भी, विदेश में भी
मुम्बई, महाराष्ट्र। 16 जून को भारत के सबसे मशहूर वास्तुकार (जो इमारतों को आकार देते हैं) चल बसे। चाल्र्स कोरिया ने मुम्बई शहर का एक पूरा हिस्सा जिसे आज नवी मुम्बई के नाम से जाना जाता है, उसकी योजना तैयार की थी।

कोरिया ने 1958 में अपना काम शुरू किया और सबसे पहली इमारत जो उन्होंने तैयार की वो थी महात्मा गांधी की याद में गुजरात के अहमदाबाद शहर में बना गांधी आश्रम। कोरिया ने मध्य प्रदेश राज्य की विधानसभा की बिल्डिंग भी बनाई।

कोरिया अलग सोव रखते थे। वैसे तो उनकी सभी इमारतों का डिज़्ााइन बदलते समय को ध्यान में रखते हुए आधुनिक था पर उन्होंने गरीबों के लिए किफायती आवास बनाने पर काफी काम किया।

दिल्ली, मुम्बई, कोलकता, जयपुर, भोपाल जैसे शहरों से लेकर यूरोप के पुर्तगाल देश और कनाडा देश में भी कोरिया ने कई इमारतों पर काम किया।