दो औरतों की दुनिया का सच

निशा पाहुजा
निशा पाहुजा

जिला लखनऊ। 11 मई को लखनऊ में डाक्युमेन्ट्री फिल्म ’द वर्ल्ड बिफोर हर’ यानी दुनिया उसके पहले दिखाई गई। फिल्म की डायरेक्टर निशा पाहुजा ने बताया कि डेढ़ घंटे की फिल्म लोगों को ये सोचने पर मजबूर कर देती है कि लड़कियां कहां आजाद हैं?
दो लड़कियों की कहानी एक साथ चलती है। एक तरफ मिस इंडिया की प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए तैयारी कर रही रूही सिंह है तो दूसरी तरफ हिंदूवादी संगठन दुर्गा वाहिनी सेना को प्रशिक्षण देने वाली प्राची त्रिवेदी। मुंबई में मिस इंडिया में भाग लेने वाली लड़कियों का प्रशिक्षण कैंम्प लगा है। जबकि औरंगाबाद गांव में दुर्गावाहिनी सेना के लिए प्रशिक्षण कैंप चल रहा है। दुर्गावाहिनी सेना एक कट्टर हिंदूवादी संगठन है। यहां औरतों को हिंदू धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। फिल्म में प्राची बेहद मजबूत दिखाई पड़ती है। वह शादी को ज्यादा महत्व नहीं देती। मगर पिता के सामने मानना पड़ता है कि हिंदू धर्म में शादी जरूरी है। दूसरी तरफ मिस इंडिया के लिए तैयारी में जुटी रूही को परिवार का पूरा सहयोग है। मगर अपने और अपने परिवार के सपने को पूरा करने के लिए वह इन उलझनों को मन में ही रखती है। दोनों ही कैंप में लड़कियों के भीतर आत्मविश्वास भरने की ट्रेनिंग चल रही है।
प्राची धर्म की कट्टरता के सामने घुटने टेकती है तो रूही सिंह सुंदर दिखने के लिए कई समझौते करती है। निशा पाहुजा ने बताया कि मैं भारत में आधुनिक और पुरानी सोच के खांचे में बंद दो औरतों के सशक्तिकरण की परिभाषा को सबके सामने लाना चाहती थी।
इस फिल्म को अब तक उन्नीस अवार्ड मिल चुके हैं। इस फिल्म को बनाने कि प्रेरणा कहां से मिली इसके जवाब में निशा पाहुजा ने बताया कि मैंने सिर्फ मिस इंडिया कैंप में रहने वाली लड़कियों पर फिल्म बनाने कि सोची थी, लेकिन फिर लगा कि जो लोग उसका विरोध करते है उसे भी इसके साथ जोड़ना चाहिए। जहां दुर्गा वाहिनी कैम्प में किसी खास समुदाय से नफरत करना सिखाया जाता है वहीं मिस इंडिया वाली कैंप में उसे वह बनाया जाता है जो वह अब तक नहीं थी।