दंगों के बाद – लड़कियों के भविष्यों का सवाल

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मलकपुर राहत कैंप

उत्तर प्रदेश। यहां के मुजफ्फरनगर जि़ला सहित कई जिलों में 7 सितम्बर 2013 से मुस्लिम और जाट समुदाय के बीच हुए दंगे लड़कियों के भविष्य की दिशा बदलने का कारण बन गए  हैं। शामली जिले के मलकपुर राहत कैंप में चैदह सौ झोपडि़यों के बीच रह रहे दस हजार लोग 25 अक्टूबर को कम उम्र में अपनी तिरपन लड़कियों का निकाह पढ़ के विदाई कर रहें हैं।
इसी कैंप में बाघपत जि़ले के राठोर गांव से आई असगरी का कहना है कि अपने घर में अच्छी तरह से होती तो अपनी बेटी रेशमा की शादी सोलह साल की उम्र में न करती। मुसीबत से भयभीत होकर वे अपनी लड़कियों की शादी कर रहें हैं। इसी तरह मुजफ्फरनगर जि़ले के सौरम गांव की आबिदा की शादी सत्रह वर्ष में और वरिशा की शादी भी कम उम्र में हो रही है। इनके परिवार के लोगों का मानना है कि अब अपनी और अपनी लड़कियों की इज्जत बचाने के लिए उनकों ससुराल भेजना ज़रूरी है।
मलकपुर कैंप की देखरेख करने वाली अम्दादुल कमिटी के अध्यक्ष हाजी दिलशाद ने बताया कि हमारी कमिटी में पचास लोग हैं। आस पास के गांव के उच्च मुस्लमान समुदाय के जो लोग रहते हैं उनसे हमंे सहयोग मिलता है। इन शादियों में हर लड़की को कमिटी ने पंद्रह हजार रुपए, ग्यारह जोड़ी कपड़े, ग्यारह बर्तन और गद्दे रज़ाई दिए हैं। सरकार से हमें कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। एक लड़की की शादी में लगभग दस हज़ार रूपए का खर्च है। समुदाय के लोग इस खर्च में कपड़ों के लिए, खाने के लिए और शादी करवाने में सहयोग कर रहें हैं। सरकार से मदद के लिए भी हम लोग पहल कर रहें हैं, दरखास दे रहें हैं ताकि लोगों को ज़मीन, घर और रोज़गार मिले।