त्योहारों के रंग छाए हर ओर

असम, तमिल नाड और कई राज्य। 14 जनवरी को उत्तर भारत में अधिकतर लोग मकर संक्रांती के नाम से जानते हैं। पंजाब राज्य में इस ही समय लोहड़ी नाम का त्योहार मनाया जाता है। वही पूर्वी भारत के असम में मनाते हैं माघ बीहू और दक्षिण भारत के तमिल नाड में पोंगल। देश के सभी कोनों में फसलों की कटाई को रंग बिरंगे तरीकों से मनाया जाता है।

16-01-14 Mano - Magh Bihu
‘माघ बीहू’ में होता है नाच-गाना और कई खेल

असम। पूर्वोत्तर भारत के इस राज्य में माघ बीहू मनाया जाता है। यहां यह त्योहार फसलों की कटाई के सीज़न के अंत में मनाया जाता है।
कई तरह के खेल भी कटाई की खुशी मनाने के लिए आयोजित किए जाते हैं, जैसे कि भैंसों के बीच लड़ाई, मुर्गों के बीच लड़ाई और साथ में असम का खास नाच, ढोल पर गीत और सब मिलकर गाने गाते हैं और स्वादिष्ट पकवान खाते हैं।

16-01-14 Mano - Makar Sankranti
मकर संक्रांती की पहचान है आसमान में हज़ारों पतंगें

14 जनवरी को देश के अलग अलग राज्यों में लोगों ने मनाई मकर संक्रांती। संक्रांती का यह त्योहार हिंदुओं में फसल की कटाई के सीज़न की शुरूआत के आगमन के लिए मनाया जाता है। सालों से लोग इस दिन जनवरी के सर्द दिन में पतंगें बनाते हैं और उड़ाते हैं। माना जाता है कि संक्रांती के बाद से साल का शुभ समय शुरू होता है।

16-01-14 Mano - Pongal
पोंगल को धूमधाम से मनाते हैं

तमिल नाड। दक्षिण भारत के इस राज्य में लोग संक्रांती को ही पोंगल नाम के त्योहार के रूप में मनाते हैं। तमिल नाड के लोग इसे त्योहारों का त्योहार मानते हैं। पोंगल शब्द का अर्थ है बरकत। पोंगल पर लोग सूरज को धन्यवाद करते हैं क्योंकि धूप का खेती से खास जुड़ाव है। पोंगल तीन दिनों तक मनाया जाता है और इस त्योहार के समय लोग अपने घरों को आम और केले के पत्तों से सजाते हैं।