तोडि़स रिवाज औरत चलावत नाव

pauharजिला बांदा, ब्लाक नरैनी, गांव पौहार। हेंया के रामदुलारी दस साल से नाव बागै नदी मऊ घाट मा चला के पुरूष के बराबरी का काम करत है।
रामदुलारी बताइस की मोरे घर मा बहुतै गरीबी रहैं हमरे पास कउनौ तान का रोजगार नहीं रहै। मोर पति नाव चला के थोई बहुत रूपिया कमा लेत रहैं, पै घर का खर्च नहीं पूजत रहै। मैं पहिले घर अउर खेती किसानी का काम करत रहौं। पति का नाव चलावब देख नाव चलावैं का मोर मन भी करैं लाग, पै घर वाले नाव चलावैं से मना कई दिहिन। या बात मोहिका नींक नहीं लाग तबै मैं जिद ठान लीनेव कि अब नाव चला के मनिहौं। जबै मैं नाव चलावब शुरू करेंव तौ मड़ई मोर मजाक उड़ावत रहै। मैं मड़इन का आपन नाव मा बइठा के या पार से वा पार करावैं लागिंव। कुछ महीनन के बाद गांव वालेन का मोर काम नींक लाग। ज्यादा कइके सवारी अब मोरे नाव मा बइठत हंै। हमार गांवन के अस्सी डेहरी बन्धी हैं। मड़ई नाव मा घाट पार करै का साल भर मा अनाज देत हैं। अगर बाहरी मड़ई आवत हैं तौ उनसे दस रूपिया एक बार के घाट पार करैं मा लेत हौं। दिन भर मा सौ रूपिया तक के कमाई कई लेत हौं।