डाकुअन के डेर से कबै मिली निजात

(फोटो साभार: दीपक राय | wildexpeditionindia.com)
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चित्रकूट अउर बांदा के जंगली क्षेत्र के जनता एक महीना से डाकुअन के दहषत मा जियै का मजबूर हैं। डाकू गांव मा जाके अलग अलग वारदात करै मा आपन सफलता लगातार पावत जात हैं। डाकू कतौ सरकारी काम मा कमीषन मांगात हंै तौ कतौ अपहरण अउर मारपीट के जरिया आपन खौफ जमाये हैं। पै षासन प्रषासन इनका पकड़ पावै मा नाकाम काहे है।
एक महीना पहिले भी बलखडिया के करंट से घायल होय के सूचना मा पुलिस चित्रकूट अउर बांदा के जंगली क्षेत्रत का खगारै मा कसर नहीं छोडिस पै वा हाथ नहीं लाग है। कइयौ दरकी या भी खबर आई है पुलिस अउर डाकुअन के बीच मा मुठभेड तक भे पै उनका खाली हाथ ही लउटै का परा है। पता नहीं की प्रषासन के कसत के प्लानिंग है कि डाकू बच के निकल जात हैं। जबै की मायावती के सरकार के समय डाकुअन के सफाया मा ज्यदा समय ही नहीं लाग है। ठोकिया अउर ददुआ जइसे नामित डकैतन का सफाया कीन गा है।
सरकार अगर चाह ले तौ डाकुअन के पकडै मा ज्यादा समय नहीं लाग सकत हैं। सरकार तौ डाकुअन के पकडै का तबै सचेत होत है जबै कउनौ बड़ी वारदात होई जात है। अगर डाकुअन के सफाया करै का अभियान लगातार चलावा जाय तौ पकडे जा सकत है।
प्रषासन अगर कारवाही भी करत तौ गांव के ही बेकसूर कोल आदिवासी अउर गरीब जतना के उपर कारवही या मुखबिर का नाम दइके वाहवाही लूट लेत है पै मेन सीढी तक पहुचै मा अबै उनके कदम कोसन दूर है।