जिला में डॉक्टर न हई

जिला सीतामढ़ी, प्रखण्ड रीगा, पंचायत मेहसिया, गांव दोधरा टोला। उहां वार्ड नम्बर पंद्रह के दिपा कुमारी लगभग सोलह साल के छथिन। लेकिन उ मानसिक रूप से विक्लांग छथिन। एईके बावजुद हुनका विकलांग सुविधा न मिलल हई।
दिपा के माय राधिका देवी, बाबू जी जितेन्द्र राय कहलथिन की हम त मजदूर आदमी छी, कमइली त खइली। हमरा पास तीन गो बेटी हए। जेई में दुगो के शादी कर लेले छी। अब एकर शादी विवाह केना होतई? राधिका देवी कहलथिन की ओकर कपड़ा हम सरीया देई छी। समझई छई सब कुछ लेकिन अपना मन में जे बात आएल उहें करई छई। हम जिंदा छी तओले देख-भाल करई छी। मर गेला के बाद भाई केकर होई छई। एक बेर शिविर लागल रहई त ले गेल रहीअई। उहां के डॉक्टर कहलथिन की एकर कागज मुजफ्फरपुर बनतई। मुखिया भी ऐहे बात कहई छथिन।
पंचायत सचिव विरेन्द्र सिंह कहलथिन कि उनका विक्लांग प्रमाण पत्र न हई। जेई कारण सुविधा न मिललई। एहन समस्या पंचायत के लगभग दसों लोग के साथ हई। प्रखण्ड सांखिकि पदाधिकारी शंभू शंकर अउर प्रखण्ड चिकित्सा पदाधिकारी शीव शंकर प्रसाद कहलथिन कि कान अउर हाथ,पैर से विक्लांग के प्रमाण पत्र बन जाई छई। नाक, आँख अउर दिमाग से विक्लांग के प्रमाण् पत्र बनाबे के लेल मुजफ्फरपुर या दरभंगा रेफर कर देई छी। कएला कि एई जिला में एई के डॉक्टर न मिलई छई।

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विक्लांग दिपा कुमारी