जिला अस्पतालन मा कइसेन लापरवाही

medicines wwफैजाबाद अउर अम्बेडकर नगर के सरकारी अस्पतालन मा मरीजन के साथे घोर लापरवाही हुआथै। गरीब मजदूर मनई जिला अस्पताल मा ई समझके आवाथे कि वहिं दवा सस्ते मा मिल जाये। लकिन वहिं पहुंचै पै हकीकत पता चलाथै कि सस्ती दवा तौ बहुत मुश्किल से मिल जाथै लकिन मंहगी दवा बाहर से लिख दिया जाथै।
सहादत गंज से चांदनी अउर आसमा बानों आय रहिन। इनके पेट मा दर्द रही। इनका दुई गोली दर्द कै दइके अउर सारी दवा बाहर से लिख दीनगै। बस्ती से आये रामजी बताइन कि बेटवा कै हाथ टूटगै बाय। अस्पताल मा पलास्टर तौ चढ़ाय दीनगै लकिन दवा बाहर से लिख दीन गै। ई तौ हर दिन कै एक दुई मनई कै उदाहरण आय। अस्पतालन मा ज्यादातर मरीजन के साथे इहै हुआथै। आखिर मरीजन का कवन फायदा हुआथै जवन आठ बजे से आइके लाइन लगाये रहाथिन। यहि विश्वास से कि सही से इलाज होये। लकिन उनके सोंच कै उल्टा हुआथै।
अक्सर देखाजाथै कि जब कउनौ अधिकारी का आवै का रहाथै तौ जांच मा हर दवा अस्पताल मा मौजूद रहाथै। डाक्टर व नर्स द्वारा समय समय पै मरीजन कै जांच भी हुआथै। ज्यादातर डाक्टर कै आपन निजी क्लीनिक रहाथै जहां मरीज का देखाथिन। अम्बेडकर नगर के आजनपारा गांव के चन्द्रभान कै आरोप बाय कि हमरे महतारी कै तबीयत खराब रही अस्पताल मा भर्ती करै लै गयन तौ खून कै कमी बतायके लउटाय दिहिन। भर्ती नाय लिहिन। कहिन खून चढ़े तब इनकै तबीयत ठीक होये। अउर अस्पताल मा खून नाय मिलत। बाहर से लाइके दिया तौ चढ़ाय जाये। यहि तरह से जिला अस्पताल मा मरीजन का इलाज मिलाथै। मरीज मरि जाए लकिन सुनवाई नाय हुवत।