जमीन की गर्त में छिपे ‘पानी’ को खोजते प्यासे लोग

14 साल की उम्र में पंकज स्कूल छोड़ कर मीलों दूर जा कर पानी भरता है।
14 साल की उम्र में पंकज स्कूल छोड़ कर मीलों दूर जा कर पानी भरता है।

जिला बांदा। जिले में गहराते संकट से निपटने के लिए स्थानीय लोग एक से डेढ़ किलोमीटर चल कर, साइकिलों पर पानी के बर्तन बांध कर लाते हैं। लोगों का आधे से ज्यादा दिन पानी लाने में हीं निकल जाता है। गौरतलब है कि बांदा जिले में हैंडपंपों कि संख्या 32,600 है लेकिन पानी किसी में नहीं।
नरैनी ब्लाक, गांव कुलसारी, मजरा बल्देव पुरवा।
गांव के निवासी कमलेश का कहना है कि बस्ती के कुएं का पानी लगभग सूख चुका है। जो पानी उसमें बचा है वो इतना दूषित है कि उसे पीकर जानवर भी बीमार पड़ गये हैं इसलिए स्कूल से पानी लेने जाना पड़ता है। रोजाना घर से एक किलोमीटर दूर चल कर जब हम पानी लेने जाते हैं तो स्कूल के मास्टर की फटकार झेलनी पड़ती है। कुएं का पानी पीने से मेरे माता-पिता पहले ही बीमार हैं। पिछले तीन महीनों में यह समस्या अधिक विकराल हो गई है।
गांव के लोगों ने पानी के लिए अधिकारीयों के सामने दरखास्त भी रखी लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई। टैंकर जरुर उन्होंने भेजे लेकिन वो भी कुलसारी गांव तक जाते हैं, पुरवे तक कोई आता ही नहीं।

बांदा के 14,000 तालाबों में से मात्र 80 में ही पानी!

boxedजिला बांदा 2014 की आरटीआई रिपोर्ट के अनुसार, बांदा जिले के लगभग 14 हज़ार तालाबों में से 869 तालाब सूख चुके हैं। फिलहाल राज्य सरकार द्वारा प्रशासन तालाब भरवाने का काम कर रही हैं। नलकूप विभाग के बाबू केदारनाथ का कहना है कि अब तक जिले में 80 तालाब भरवाए गए हैं। हर गांव में एक तालाब के लिए पर्याप्त पानी दिया जाएगा। अभी तक जो तालाब भरे हैं उनकी संख्या कुछ इस तरह है-

पहाड़ और जंगलों से घिरा एमपी बॉर्डर पर बसा नरैनी ब्लॉक का एक और गांव है ‘रतौली भटपुरा’। इस गांव के निवासी पंकज 14 साल की उम्र में मीलों दूर जा कर पानी भरते हैं। पानी जल्दी भर सकें इसलिए सुबह ही लाइन में लग जाते हैं।

शांति कहती हैं कि बस्ती के हैंडपंपों ने जवाब दे दिया है। घंटों चलाओ तब एक बाल्टी पानी निकलता है वो भी खारा।

इस पर प्रधान का कहना है कि गांव की आठ हजार आबादी के बीच कुल 36 हैंडपंप हैं, जिनमें से 5 रिबोर होने हैं। पहाड़ी इलाका होने कारण इस गांव में हर साल पानी की समस्या आ खड़ी होती है। लेकिन इस साल पानी के कारण लोग बेहाल हैं। गांव में 250 सौ फुट से नीचे बोर नहीं होता। जितने भी हैंडपंप लगे हैं उनमें 140 फुट का पाइप पड़ा है। गांव में पानी की टंकी के लिए कोई व्यवस्था नहीं है जिसके कारण पानी की दिक्कत अधिक बढ़ गई है।
महुआ ब्लॉक के गांव पनगरा का भी यही हाल है।
गांव के लोग एक किलोमीटर दूर चल कर मुख्य सड़क पार कर पानी भरकर लाते हैं। इस गांव कि सुमन और गुड़िया का कहना है कि हम औरतों के लिए तो इस गांव में सब से कठिन पानी भरना है। जिसके लिए घर का सारा काम छोड़ना पड़ता है।
मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार कहते हैं कि सूखे के कारण पानी कि समस्या हर जगह बनी है। जिसके लिए ग्राम पंचायतो द्वरा व्यवस्था भी कराई जा रही है। कुछ बस्तियां जहां पानी की अधिक समस्या है वहां टैंकर भेजे जा रहे हैं। साथ ही 560 नए हैंडपंप लगने हैं।

रिपोर्टर – गीता