जब वोट के दिन आएल त हमने के याद आएल

Kasba Aavasजिला वाराणसी, नगर क्षेत्र शिवपुर लक्ष्मनपुर। इहां के दलित बस्ती के आबादी लगभग पन्द्रह सौ हव। लेकिन इहां पर अभहीं तक नाहीं मिलल हव कालोनी । राशन कार्ड हव उ भी पीला। ना तो हमने के रहे के ठिकाना हव। हमने रिक्शा चलावे वाला आदमी तीन पीढ़ी से अहिसहीं मड़ई झोपड़ी में रहत हई। इहां के शकुन्तला, बेचू, सुरेन्द्र, राजेन्द्र इ सब लोगन के कहब हव कि हमने इ साल कोई के वोट देवे के मन नाहीं करत हव। लोग सांसद विधायक बन के अपने अपने घरे बतइलन। हमने जहां के जहां पड़ल रह जाइला। जब वोट के बारी आई त लोग आके चिकनी चिकनी बतियावे लगलन। लेकिन हमने के हालत के सुधार करे वाला कोई नाहीं हव। सभासद  शिवशंकर यादव के कहब हव कि कई बार प्रस्ताव देहली लेकिन अभहीं तक कालोनी नाहीं आएल हव। जब आई त देब।