जंगल से तोड़कर फिर बनाती है दोने और पत्तल, अगली बार शादी में जाए, तो ध्यान से देखना!

जिला चित्रकूट, ब्लाक मऊ, गांव अहिरी, मजरा छिवल शादी ब्याह का मौसम अउतेन बाजार मा पत्तल अउर दोना बिकत देखाई पड़त हवैं। सुकरी रात दिन कड़ी मेहनत कइके पत्तल अउर दोना बनावत हवै। वा दस किलोमीटर दूरी बरगढ़ घाटी अउर परानू बाबा के जंगल से पत्ता तोड़ के लावत हवै।
फाइबर के जमाना मा पत्तल कम देखात हवै पै सुकरी पत्तल बनावै मा कउनौ कसर नहीं छोड़त आय। सुकरी का कहब हवै कि एक दिन मा दुई-तीन सौ पत्तल अउर दोना बना लेत हौं।
एक गड्डी मा पत्तल अउर दोना रहत हवैं। एक गड्डी पत्तल 30 रुपिया के अउर दोना 20 रूपये के बिकत हवैं। गरीब मड़ई पत्ता खरीदत हवै बड़े आदमी तौ फाइबर के खरीदत हवैं। पत्तल बनावै मा मैं बहुतै मेहनत करत हौं। सुबेरे 5 बजे उठ बस अड्डा जइत हन। बस मा चढ़ के आसपास के इलाका मा पत्तल तोड़े जइत हन।
दुइ कोस पत्ता मूड़े मा रख के मैं पैदल आवत हौं। फेर पत्ता अलग अलग कइके रात के दिया जला के पत्तल बनाइत हन। कत्तो कत्तो हजार पांच सौ इकटठा बिक जात हवैं नहीं तौ थोड़ी थोड़ी बिकत रहत हवैं।

रिपोर्टर- सुनीता

18/05/2017 को प्रकाशित