ग्रामीण स्थापना केंद्रों ने जगाई नई उम्मीद

02-01-14 Kshetriya - Karwi Mandiजिला चित्रकूट। 2013-14 साल में जिले में गल्ला ग्रामीण स्थापना केन्द्र बनाने का काम चालू किया गया। इसके लिए केन्द्र सरकार और राज्य सरकार ने मिलकर चैदह केन्द्रों के लिए अट्ठाइस करोड़ का बजट पास किया।
ब्लाक मानिकपुर में घाटी में ग्रामीण स्थापना केन्द्र बन रहा है। यहां पर काम करने वाले मज़दूर गोमती और ष्याम ने बताया कि एक साल से मण्डी बनने से लगभग पचास लोगों को रोज़गार मिला है।
ब्लाक मऊ, कस्बा बरगढ़ में ग्रामीण स्थापना केन्द्र बन रहा है। सेमरा गांव की राजकुमारी हर्दिकला गांव की ष्यामवती पहले मऊ कस्बा में गल्ला बेचने जाती थीं। किराया बहुत खर्च होता था। अब लोगों को ग्रामीण स्थापना केन्द्र में रोज़गार मिल रहा है।
ब्लाक पहाड़ी, कस्बा पहाड़ी, अरछा बरेठी रोड। यहां भी गल्ले के लिए ग्रामीण स्थापना केन्द्र बन रहा है। ग्रामीण स्थापना केन्द्र के मैनेजर देवेन्द्र सिंह ने बताया कि इन केंद्रों का उद्देष्य है कि किसानों को गल्ला बेचने के लिए इधर-उधर भटकना ना पड़े है। एक केन्द्र में लगभग सौ से डेढ़ सौ गांव के किसानों को फायदा होगा।
इस समय पूरे बुन्देलखंड में सपा सरकार के खास ‘बुंन्देलखंड पैकेज’ के तहत इन केंद्रों को बांदा, झांसी, हमीरपुर, ललितपुर आदि में भी बनवाया जा रहा है।

बांदा डिविजन के निर्माण खण्ड विभाग के जे.ई. रावेन्द्र सिंह का कहना है कि इन मण्डियों का उद्देष्य है कि किसानों को हर तरह की सुविधा मिले और खाद-बीज की दुकानें खोली जाएं। यह कार्य मार्च 2014 तक पूरा हो जाएगा। प्रति मण्डी बनने के लिए केन्द्र सरकार एक लाख पैंतालिस हज़ार रुपय का सहयोग करती है। बाकी राज्य मण्डी परिषद करता है। प्रति मण्डी बनने के लिए दो करोड़ रुपय खर्च किए जा रहे हैं।