गलियों से स्टेडियम

26-02-15 Banda Cricketer - Shobha 1 for webजिला बांदा। शोभा  सिंह खंगार बुन्देलखण्ड की इकलौती लड़की है जो क्रिकेट की दुनिया में देष के कोने-कोने में अपने परिवार और जिले का नाम रोषन कर रही है। सरस्वती बालिका मन्दिर केन पथ इंटरकालेज की कक्षा दस की ये छात्रा चार साल से क्रिकेट खेल रही है। अभी तक इलाहाबाद, नागपुर, केरल, कन्नौज में खेल चुकी है। अब रणजी ट्राॅफी की टीम के लिए तैयारी कर रही है।
खेल में रूचि का क्या इतिहास है?
मुहल्लों की गलियों में पापा और भाई-बहन के साथ छह साल की उम्र से खेलना षुरू किया। धीरे-धीरे स्कूल में बाज़ी मारी। तब मुझे स्टेडियम में खेलने की इजाज़त मिली। वहीं से सफर शुरू हुआ। मेरा मुख्य खेल क्रिकेट है। इसके अलावा गोला फेंक, भाला फेंक और खो-खो जैसे खेलों में भी राष्ट्रीय जीत हासिल कर चुकी हूं।
आपका क्या सपना है? 
एक षानदार क्रिकेटर बनने का सपना है। इस क्षेत्र में कम लड़कियां हैं। इसलिए मेरे माता-पिता और स्कूल के प्रिंसिपल और टीचर का प्रोत्यसाहन ज़रूरी था। सबसे बड़ा हाथ स्टेडियम के खिलाड़ी टीचर का रहा है। मैं इन सब के सपने पूरे करना चाहती हूं।