खाद्य सुरक्षा योजनाः तीन महीने बाद भी नहीं मिली कोई राहत

कोटेदार का कहना है कि गांव के 2500 इकाइयों के लिए सिर्फ 1120 यूनिट राशन मिले हैं
कोटेदार का कहना है कि गांव के 2500 इकाइयों के लिए सिर्फ 1120 यूनिट राशन मिले हैं

उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 1 मार्च को राज्य के सभी 75 जिलों में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के विस्तार की घोषणा की। इससे पहले 1 जनवरी को भी खाद्य सुरक्षा अधिनियम को 29 जिलों में लागू किया गया। इस अधिनियम के तहत सूखाग्रस्त बुंदेलखंड को विशेष पैकेज देने की भी घोषणा हुई।
राज्य सरकार ने कहा है कि खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश की 75 प्रतिशत आबादी वाला भाग यानि 1.64 करोड़ लोग या 40.90 लाख परिवारों को यह कवर करता है। ये परिवार 3 रुपये प्रति किलो की दर से मिलने वाले गेहूं और चावल को छुट के साथ 2 रुपये प्रति किलो पर प्राप्त कर सकता है।
जनवरी में योजना लागू होने के कुछ हफ्ते बाद ही खबर लहरिया ने इस योजना का सच सबके सामने रखा कि कैसे लोगों के राशन कार्ड से राशन कम किया जा रहा है. जैसे, प्रेमा के 8 सदस्यों वाले परिवार को सिर्फ एक इकाई मान कर राशन दिया गया। जबकि प्रत्येक सदस्य के हिसाब से 30 किलो खाद्यान्न मिलना चाहिए था।
अखिलेश सरकार ने एक और विशेष बुंदेलखंड पैकेज की घोषणा की है जिसमें दो लाख अंत्योदय कार्ड धारकों को देशी घी, चने की दाल, आलू, खाद्य तेल और दूध पाउडर दिया जाएगा। जरुरी बात यह है कि इस पैकेज के बारे में बांदा के अधिकारियों को कोई जानकारी नहीं है।
raskn card copyइस बारे में जांच-पड़ताल करने के लिए खबर लहरिया ने नरैनी ब्लाक का जायजा लिया जहां इस बार भी उनके हाथ निराशा लगी। सभी कार्य अधूरे और लापरवाही के साथ चल रहे थे।
फरवरी में, अब्दुल अजीज ने इस योजना के तहत प्रति यूनिट 5 किलो राशन प्राप्त किया। यह राशन पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर वितरित किया गया था। इस आधार पर एपीएल और बीपीएल कार्ड धारकों में से अधिकांश लोगों ने राशन ले लिया था। कोटेदार शमसुद खां कहते हैं कि ‘‘गांव के 2500 इकाइयों पर हमें केवल 1120 इकाइयों के हिसाब से राशन मिल रहा है।’’ यही नहीं, खाद्य सुरक्षा अधिनियम से जुड़ी अन्य समस्याएं भी सामने आ रही हैं। नसेनी ग्रम पंचायत में तीन महीनें का राशन सिर्फ एक बार ही दिया गया। गांव वालों का कहना है कि मार्च का राशन दुकानों में आ गया है लेकिन अभी तक वितरित नहीं किया गया।
इस अधिनियम की ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली भी त्रुटिपूर्ण है। इस प्रणाली के लिए ऐसे घर की जरूरत है जहां से खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पंजीकृत फार्म ऑनलाइन रजिस्टर्ड हो। कई ऐसे फॉर्म हैं जिन पर खाद्य सुरक्षा स्टाम्प नहीं है। ऐसे कई मामले हैं जहां राशन कार्ड में राशन, मात्रा, और राशि जारी करने की तिथि लिखी होने के बाद भी उस परिवार को राशन नहीं दिया गया है।
जिला पूर्ति अधिकारी आनंद कुमार सिंह का कहना है कि ‘‘खाद्य सुरक्षा कानून को लागू करने में सबसे बड़ी चुनौती ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली की है। हमने दुकानों में जनवरी, फरवरी और मार्च महीने के लिए राशन भेज दिया है। लेकिन अगर परिवारों को अब तक राशन नहीं मिला है, तो हम कोटेदारों से पूछताछ करना शुरू करेंगे। हमने केवल अंत्योदय परिवारों को मिल रहे लाभों के बारे में सुना है लेकिन हमें इससे संबंधित कोई आदेश नहीं मिला है।’’
विशेष पैकेज के लिए निर्देश मिलने के इंतजार में कई हजारों परिवार खाद्य सुरक्षा के समावेश से बाहर होते जा रहे हैं। लेकिन सरकार अभी भी इस पर मौन साध कर बैठी है।