खर्च करोड़ो रूपईया, फायदा कुछो न

आर्थिक जातिये अउर समाजिक जनगणना जे भेलईह। ओइ में सरकार के लाखों रूपईया खर्च भेलईह। लेकिन इ काम सफल न भेलई। अभि जनगणना के सुची जे अलइह उ सुची देखके सब लोग परेशान छथिन।
जइसे सीतामढ़ी अउर शिवहर जिला में देखला मिल रहल हई कि जे मजदूर लोग छथिन उनका सब के मासिक आमदनी बहुत ज्यादा कर देल गेल हई। जेई लोग के आर्थिक स्थिति ठीक हई। ओई लोग के गरीबी रेखा से निचे कर देल गेल हई।  केतना के नामे न र्हइं त केतना के लिस्टे न आयल हई। एई जनगणना के लेके सब लोग काम धंधा छोड़के पंचायत, प्रखण्ड अउर जिला तक दउर रहल छथिन। गरिब आदमी के रोजी भी मरइ्र छई। उ कमतई न त खतई कथी? एई काम के सुधार कइसे कयल जतई? जबकि इ रिकाॅर्ड सरकारी कर्मी के पास हईते हई। अभि जे नया नियम सरकार लागू कलथिन ह कि सेविका, आशा, अउर अन्य बेरोजगार लोग के जनगणना करेला देले रहथिन। इ लोग कोन तरिका के जनगणना कलथिन? कि सौ से नब्बे प्रतिशत लोग के सुची गलत ही आयल हई। एई काम के लेल सरकार के लेल जे रूपईया खर्च भेलई त उ त बेकारे गेलई।
अगर एई लोग के काम देलथिन त उनका सबके सही प्रशिक्षण देवे के चाही कि घरे-घरे जनगणना करेके चाही, न कि एक जगह बइठके। ऐही कारण जनगणना के रिर्पोट में ऐतना गलती भेल हई। इ काम के जिम्मेवार कोन होइथिन?