केसे सुधरहे बच्चन को भविष्य

महोबा जिला में एसे केऊ गांवन के स्कूल हे जीखे बने बीस साल हो गये हें पे अभे तक ऊ स्कूलन की बाउन्ड्री बने नोमत नई आई हे। जीसे बच्चा न तो पढ़ पाउत हे ओर न खेल पाउत हे। जभे की खेले बस की परेशानी नइयां बल्की गांव के बच्चन की जिन्दगी को सवाल हे। बाउन्ड्री न होंय से बिटियां अगर स्कूल जात हे तो गांव के आदमी पढ़े जाये से मना करत हे कि स्कूल चारो केती से खुला हे कछू सुविधा नइयां। लड़का तो कहूं भी जाके पढ़ सकत हे, पे बिटियन खा बाहर निकरब कुश्किल पर जात हे। एक केती तो सरकार बच्चन खा देश को भविष्य कहत हे, ओर दूसर केती बच्चन की पढ़ाई ओर विकाश में कोनऊ ध्यान नई देत आय।
महोबा जिला जैतपुर ब्लाक के अकौनी गांव के प्राथमिक स्कूल ओर पनवाड़ी ब्लाक के तुर्रा मोहार गांवन के प्राथमिक स्कूलन बिना बाउन्ड्री के बनेहें। जीखो न तो सरकार ध्यान देत हे न तो कोनऊ अधिकारी। महोबा जिला में पचास प्रतिशत स्कूल बिना बाउन्ड्री के हे तो पता नइयां गांव के कित्ते बच्चन की जिन्दगी बिना पढ़ाई के बरबाद होत हे। का से बडे़-बड़े शहरन मा तो बच्चा पढ़ लेत हे । पे ज्यादातर गांव के बच्चा नई पढ़ पाउत हे।
जीसे ऊनखी जिन्दगी बिना पढे़ रह जात हे। अगर बीस साल को स्कूल बनो आय तो सरकार ओर अधिकारियन खा ई बात को ध्यान देय खा चाही? जीसे बच्चन को भविष्य सुधर सके। अधिकारी बजट न आयें को बहाना करके आपन पल्ला काय झाड़ देत हें। सरकार खा गांव में कोनऊ काम करें से पेहले सोचे खा चाही की अधूरो काम छाड़े से गांव मे कित्ती परेशानी आ सकत हे। आखिर सरकार अधूरो काम करा के काय छोड़ देत हे?