कुपोषित मगर आंकड़ों में नहीं दर्ज

जिला चित्रकूट, ब्लाक कर्वी। बनकट गांव की विमला देवी के 16 जून को जुड़वा लड़कियां पैदा हुईं। एक लड़की अस्पताल के रास्ते में पैदा हुई और फौरन मर गई। दूसरी सोनेपुर जिला अस्पताल में हुई। उसका वज़न डाक्टरों ने डेढ़ किलो बताकर डिलेवरी के फौरन बाद मां को घर भेज दिया पर विमला देवी ने बताया कि डाक्टरों ने अब तक बच्ची का वज़न नहीं किया था।
डिलेवरी साढ़े सात महीने में ही हो गई थी फिर भी विमला देवी को डिसचार्ज कर दिया गया। बच्ची न तो दूध पी रही है न ही आंखें खोलती है। देखने में वह बेहद कमज़ोर है। विमला ने बताया कि वह न तो दूध पी रही है और न हीं आंखे खोलती है। सवाल उठता है कि इस बच्ची को क्या सरकारी आकड़ों में कुपोषित बच्चों में गिना जाएगा?

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बच्ची न तो दूध पी पा रही है। न हीं आंखे ही खोलती है।

जिला चित्रकूट, ब्लाक रामनगर, गांव हन्ना, शिवरतन का डेरा। यहां की रहने वाली गेंदिया ने बताया कि बहू मंजू के 16 जून को लड़की पैदा हुई थी। उसका वज़न एक किलो है। वह सुस्त है और रोती नहीं है। इस कारण से चिंता है। लोगों को जानकारी नहीं है कि कुपोषित बच्चे को कहां भर्ती करें।
गेंदिया बताती है कि मेरी बहू मंजू की बिटिया बहुत कमज़ोर है। हाथ पैर भी नहीं चलाती है। लेकिन केन्द्र में कोई व्यवस्था नहीं है। डाक्टर दूसरी जगह ले जाने को कह रहे हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के डाक्टर रमाकान्त चैरिहा का कहना है कि सोनेपुर अस्पताल में या फिर जानकीकुण्ड ले जाएं। क्योंकि कुपोषित बच्चों के लिए यहां कोई व्यवस्था नहीं है।

ब्लाक मानिकपुर, गांव ऐंचवारा। यहां की कुंती ने बताया कि बहू सुनीता के 22 जून 2014 की रात में लड़का पैदा हुआ है। वह बहुत कमज़ोर है। रोने की भी शक्ति नहीं है। मानिकपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के अधीक्षक विनय कुमार का कहना है कि कुंती को जल्दी से जल्दी इसे जानकीकुण्ड अस्पताल में ले जाना चाहिए वहां आक्सीजन लग जाएगा। क्योंकि यहां व्यवस्था नहीं है।