कि बरसा जब कृषि सुखाय

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पानी बिना धान पियासल

एई साल समय से पहिले अउर देरी से बरसात होय के मार किसान के उपर पहाड़ बन के टूट
रहल हई। कयला कि बरसात न होय से फसल जल रहल हई। कृषि विशेषज्ञ कहलथिन कि
अगर एक सप्ताह वर्षा न होतई त अकाल पड़ जतई।
सीतामढ़ी जिला, पोसुआ, हरिछपरा गांव के दिलीप, जोगिन्दर कहलथिन कि हम सब मनखप
पर खेती ले लेइछी। अब हम खेत वाला के कहां से अनाज देबई? जयनगर गांव के मंजू अउर
सुमित्रा कहलथिन कि एक सप्ताह में हमरा सब के सब्जी से लगभग छः या सात हजार रूपईया
कमाई होइत रहलई लेकिन अभी सप्ताह में तीन-चार सौ रूपईया के आमदनी हई। टंडसपुर के
चना देवी अउर उनकर बेटा प्रमोध राम कहलथिन कि हम दु बेर से ईख के खेती करई छी।
लेकिन पानी न होय के कारण ईख के विकास न होरल रहल हई। बथनाहा प्रखण्ड के बी.डी.ओ. मोहम्मद कलामुद्दीन कहलथिन कि अगर खेत के रसीद अउर पहचान पत्र लगा के जे किसान आवेदन देथिन उनका सरकारी लाभ मिलतई। शिवहर जिला के
गांव कोलसो के शोभा देवी अउर राजेश कुमार कहलथिन कि एबकी समय से पहिले पानी बरस गेल जइसे मूंग के फसल नुकसान हो गेलई। अब जबकि जरूरत हई त पानी न हई। कृषि विश्वविद्यालय के प्रभारी राजकुमार कहलथिन कि धान के फसल के लेल
बारह सौ मिलि लीटर वर्षा होय के चाही लेकिन एई साल दु से अढ़ाई सौ मिली लीटर ही वर्षा होलइय। अगर धान न होतई त लोग अगते तोरी, अरहर अउर मूली के खेती कर सकइ छथिन