किसान रैली में जमकर बोले राहुल

rahul gandhiनई दिल्ली। राहुल गांधी उनसठ दिनों बाद छुट्टी से लौटे और फौरन उन्होंने 19 अप्रैल को किसान रैली की। यह रैली दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई। इसमें देशभर से हज़ारों किसान जुटे। रैली में राहुल गांधी ने अपना रिपोर्ट कार्ड जमकर पढ़ा। उन्होंने बताया कि वह भट्टा परसौल के किसानों के साथ लड़ाई में शामिल थे। बुंदेलखंड के एक गांव में किसान परिवार के साथ बैठकर उसका दुख बांटा था। मोदी सरकार लगातार उनके निशाने पर रही है।

रैली की खास बातें
– राहुल गांधी ने भूमि अधिग्रहण विधेयक का विरोध किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आधारित सरकार के समय लाए गए विधेयक को बिल्कुल बदल दिया गया है। हमारे विधेयक में हम किसानों की जमीन लेते वक्त उनकी राय को प्रमुखता देते थे। किसान अपनी मर्जी से ज़मीन देता था। मगर मौजूदा विधेयक में किसान के पास न कहने का हक नहीं है।
– उन्होंने कहा कि हमने किसानों का सत्तर हज़ार करोड़ का कर्ज माफ किया था। पर यह सरकार तो किसानों को मरते देख रही है। बर्बाद फसलों के बाद मुआवज़ा देने में लगातार किसानों के साथ मज़ाक हो रहा है। पर मोदी सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।

भूमि अधिग्रहण विधेयक पर हंगामा
राज्यसभा में भूमि अधिग्रहण अध्यादेश 21 अप्रैल को लाया गया। कांग्रेस समेत सभा पार्टियों ने इस अध्यादेश का विरोध किया। कांग्रेस का कहना है कि इतनी जल्दी क्या है अध्यादेश लाने की? यह किसान विरोधी है। पहले इस पर बहस हो फिर किसानों के हित को देखते हुए बदलाव किए जाएं तभी यह विधेयक पास होना चाहिए। अध्यादेश का मतलब है कि छह महीने के लिए इस विधेयक के सारे नियम लागू हो जाएंगे। भारतीय जनता पार्टी इस अध्यादेश को लाने के लिए पूरी कोशिश कर रही है।

रैली में की आत्महत्या
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी ने 22 अप्रैल को दिल्ली के जंतर मंतर में रैली की। रैली के बीच में ही एक किसान ने आत्महत्या कर ली। करीब डेढ़ बजे दौसा के नांगल (राजस्थान) से आए इस किसान ने पेड़ पर चढ़ कर जान देने की कोशिश की। उसे अस्पताल ले जाया गया।
आम आदमी पार्टी ने ज़मीन अधिग्रहण बिल के विरोध में रैली की थी। इसी दौरान गजेंद्र नाम का 45 वर्षीय किसान पेड़ पर चढ़ गया और फंदे पर झूलने की कोशिश करने लगा। तभी भीड़ से कुछ लोग निकले और उन्होंने उसे उतारा। अस्पताल में भर्ती कराया। किसान के पास से एक पत्र भी बरामद किया गया है, जिसमें लिखा है कि उसके पास फसल बर्बा होने के बाद तीन बच्चों को खिलाने के लिए भी कुछ नहीं है।