का मन भीतर के डेर का हटा पाई प्रशासन ?

उंई लोगन का कउन कसूर जउन पहाड़ी, जगली अउर पिछड़े इलाकन मा रहत हैं। चुनाव को जीती को हारी उनसे कउनौ मतलब नहीं। रोज का खाना जुटावैं मा खून पसीना बहावत लोग फेर भी उनसे छिनत है उनकर रोटी, उनकर आजादी और साथै वोट डारैं का अधिकार भी। कुछ खास पार्टिन का जिवावैं खातिर बदमाश खुले आम मड़इन का मारे डारत हैं। कतौ सग्राम सिंह आतंक मचाये है तौ कतौ बलखडिया। आपन बात कहैं मा हत्या तक कई दीन जात है। चुनाव के चुने सांसद संसद तक जा के कानून बनावत हैं। चुनाव के समय या हाल है कि जउन कानून बनावत उंई खुदै छीनत हैं या छिनवावत हैं।
प्रशासन भी दावा करत हैं कि वा शत-प्रतिशत बेगैर कउनौ डेर के चुनाव करावा जई, पै जउनतान गांवन मा आंतक है वहिसे भरोसा टूट जात है कि प्रशासन केतना जिम्मेदार है। दूसरे के मन के पहिले उनका वोट आपन मन से नहीं दूसरे के मन से डारैं का मजबूर होय का परत है। और चुनाव मा जीत के आवा नेता इं लोगन के खातिर कुछ नहीं करत आय। अब इनतान मा मड़ई नोटा का बटन भी नहीं दबा सकत। काहे से वहिके भीतर से दबाव बनावैं वालेन का डेर भरा है। अब का प्रशसन चुनाव के दिन भीतर का डेर हटा पाई, जेहिकर बड़े-बड़े पुल बाधे जात हैं।