का कई देखाई मिशन इन्द्रधनुष?

banda small for sandhya website updateमिशन इन्द्रधनुष, का बिखेर पाई आपन सांतो रंग? उत्तर प्रदेश सरकार के सोच के सराहना कीन जा सकत है, पै सोच के साथ काम करावैं के नहीं।
अब भला या नवा मिशन चलावैं के कउन जरूरत जबैकि कुपोषण से लड़ै खातिर पहिले से भारत सरकार के योजना चलत ही है। 1 नवम्बर से उत्तर प्रदेश सरकार कुपोषण मिशन चलाइस रहै। अब 7 अप्रैल से मिशन इन्द्रधनुष चला के सम्पूर्ण टीकाकरण करैं का ठाना गा है। मिशन के अन्दर है कि जउन बच्चा अउर गर्भवती औरतै टीकाकरण से छूटी हैं उनकर टीकाकरण कीन जई। मार्च महीना मा तीन दिन (24, 25 अउर 26 मार्च) टीकाकरण से छूटे बच्चा अउर गर्भवती औरतन का सर्वे कीन गा। जेहिमा सिर्फ बांदा शहर मा बच्चा एक हजार छह सौ तेरह अउर गर्भवती औरतै छह सौ तेइस निकले हैं। या सिर्फ तीन दिन का आकड़ा आय। इं आकड़ या सोचैं का मजबूर करत हैं कि सिर्फ तीन दिन के सर्वे मा यतनी बड़ी संख्या मा औरतैं अउर बच्चा टीकाकरण से बाहर निकले हैं वा भी शहर के बीच, तौ फेर गांव मा का अंदाजा लगावा जाय। कुपोषण काहे न फइलै, जब यतनी बड़ी योजना होय के बाद भी काम का संचालन नींक से कीन ही न जई। इं आकड़ा अपने आप मा स्वास्थ्य विभाग कर्मचारिन के करतूत के पोल खोलत हैं। जब सालो साल से चलैं वाली योजना धूल फांकत है तौ सिर्फ तीन महीना खातिर चलाये जाय वाले मिशन, का कामयाब होई पइहैं। इनतान से मिशन चला के जहां कम समय मा अधूरा काम कीन जात है होंआ सरकारी धन का दुरूपयोग भी।
नई-नई योजना कार्यक्रम चलावैं के बजाय एकै योजना का सुचारू रूप से चला के लक्ष्य तक पहुंचा जा सकत है। अगर सरकार का काम सिर्फ मिशन चला के खतम कई दें का है तौ पहिले से चलत योजना का का होई जेहिमा हर साल करोड़न रूपिया खर्च होत है?