कहूं जर्जर तौ कहूं व्यवस्था नाय

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पानी नाय आवत

कहूं स्वास्थ्य केन्द्र जर्जर होइगा बाय तौ कहूं कहूं कउनौ व्यवस्था नाय बाय। मनई मरीज का लइके स्वास्थ्य केन्द्र जाथिन की अच्छी तरह इलाज होये लकिन हुंवा कै व्यवस्था देखिके मरीज अउर बीमार होय जाथिन। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मा दवाई फ्री मिला थै तौ डाक्टर बहिरे से लिखा थिन। दवाई न मिलै तौ मरीज कै हालत अउर खराब होय जाय।
मया ब्लाक के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मा आक्शीजन मशीन रखी बाय। आक्शीजन गैस नाय बाय टोटी हर जगह लाग बाय। प्रसव कक्ष मा शौचालय मा, पर पानी नाय आवत। टंकी लाग बाय लकिन मोटर नाय बैठावा बाय। पानी बाहर से लावै का परा थै। दाई लोग बाहर से पानी लाइके मरीजन का नहवावा थिन शौचालय मा ताला लाग रहा थै। ठीक इहै हाल गोशाईगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कै बाय। अगर इहै हाल हर स्वास्थ्य केन्द्र कै रहे तौ मरीजन का सुबिधा कहां से मिले। जहां हर रोज सौ डेढ़ सौ मनई दवाई के ताई जा थिन तौ हुंवा यतनी अव्यवस्था काहे का बाय? कउनौ अधिकारी ध्यान नाय देतिन।
अम्बेडकरनगर कटेहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के टोटी से गन्दा पानी आवत बाय। हुवां के मरीज का साफ पानी न मिले तौ कहां से ठीक होये? एस व्यवस्था मा मरीज का अउर बिमारी फैला थै यकै जिम्मेदारी हुवां के डाक्टर कै हुआ थै तौ वै यकै ध्यान काहे नाय देते।
कागज मे बहुत अच्छी तरह से लिखा जा थै लकिन वकरे अनुसार सुबिधा नाय मिलत। गरीबन का वकै लाभ नाय मिल पावत।