कबाड़ बीनते बच्चे

kabaadजिला महोबा। महोबा के पनवाड़ी, चरखारी ओर महोबा, कबरई में किताबों की जगह हाथ में कबाड़ के झोले लिए कई बच्चे मिल जाएंगे। पनवाड़ी, चरखारी और कबरई जैसे कस्बो में अपने घर का खर्च चलाने के लिए कबाड़ बीनने का काम करते हैं। महोबा में कबाड़ बीनने वाले दस साल के बच्चे अहमद ने बताया कि हमारी मां को टी. बी. थी, जिससे दो साल पहले वह खतम हो गईं। अब घर चलाने की ज़िम्मेदारी मेरी और मेरे भाई की है। इसलिए हम कबाड़ बीनते हैं। इससे घर खर्च चलता है। जब इस समस्या से जूझते तमाम बच्चों को लेकर श्रम प्रवर्तनअधिकारी अतुल कुमार श्रीवास्तव से बात की तो उन्होंने बताया कि जो 8 से 14 साल के बच्चे अगर होटल या दुकान में काम करते मिलते हैं तो मालिक का चालान करने के बाद उन्हें स्कूल भेजा जाता है। पर अभी तक ज़िले में एक भी ऐसा बच्चा नहीं मिला।