कतौ भी सुरक्षित निहाय औरतें

औरतन के साथ मा बलात्कार अउर यौन शोषण की घटनाये दिनै दिन बढ़त जात हैं। इं घटनन से पीडि़त औरतन का अउर भी ज्यादा परेशान करत है। पुलिस कारवाही के जघा औरतन का थाना अदालत मा खुलेआम मजाक उड़ावा जात है। अउर आग मा घी डालै का काम करत है समाज। औरतन के हित मा काम करै वाली संस्थन मा भी यौन शोषण के घटना सउहें है। जहां औरतें अपने का सुरक्षित महसूस करत रहैं। वा जघा भी अब औरतन के साथ मा बलात्कार जइसे के केस संस्था के ही संचालक करत हैं। अबै हाल ही मा बांदा जिला के विद्याधाम समिति के संचालक राजाभइया के खिलाफ उनके ही संस्था के कार्यकर्ता यौन उत्पीड़न का आरोप लगाइस है, पै पुलिस कारवाही करै मा लड़की का उल्टा उत्पीड़न करत है। बड़े मुश्किल से रिपोर्ट दर्ज कीन गे।
कलम बन्द बयान 1 मार्च का होय का समय दीन गा रहै, पै अतर्रा के पुलिस नहीं पहुंची। लड़की दिन भर इंतजार करत रहिगे । पुलिस का फोन करै मा उंई आपन फोन भी स्वीचआफ कई लिहिन। यहै से 1 मार्च के जघा 2 मार्च का बयान दर्ज कीन गे।
लड़की का संस्था के लोग यतना तानास दिहिन के वहिके दिमागी हालत बिगड़ गे अउर कुछ लोग वहिका सरकारी अस्पताल मा भर्ती कराइन। संस्था से बराबर केस वापस ले अउर समझौता करै का दबाव मिल रहा है। संस्था के संचालक का बचावै के कोशिश काहे कीन जात है। या कउनौ पहिली घटना न होय। आय दिन घिनौनी घटना का अन्जाम दें वाले लोगन का पुलिस बचावै के कोशिश काहे करत है?