कट्टरवाद के खिलाफ जारी रहेगा संघर्ष

((फोटो साभार: विकिपीडिया)
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बांग्लादेश में अनंत बिजाए नाम के एक ब्लागर की हत्या सरेआम कर दी गई। ब्लागर यानी ऐसा लेखक जो इंटरनेट पर बनी वेबसाइट पर लिखता है। वह ब्लागर ‘मुक्तो मोना’ नाम की इस वेबसाइट पर लिखता था इस पर कट्टरवादियों के खिलाफ लिखा जाता है। अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले विचारों को वैज्ञानिक सोच से काटा जाता है। धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र को बढ़ावा दिया जाता है। मगर कट्टरवादियों को इस वैचारिक लड़ाई में यह सब चुनौती देने वाला लगा। ऐसे में कलम को उन्होंने बंदूक से शांत करना ही ठीक समझा। इससे पहले भी इसी साइट पर लिखने वाले दो और ब्लागरों को मारा जा चुका है। जून 2013 में सबसे पहले इस वेबसाइट के संस्थापक अविजीत राय को तब मारा गया जब वे बांग्लादेश एक पुस्तक मेले में शामिल होने आए थे। वह बांग्लादेशी थे मगर वह अमेरिका में बस गए थे। इसके बाद एक और ब्लागर वशीकुर्र रहमान की हत्या हुई। और अब अनंत बिजाए। हालांकि विचारों पर पाबंदी केवल बांग्लादेशा में ही नहीं है। कुछ साल पहले भारत के महाराष्ट्र में दादा दाभोलकर को मार दिया गया था। दादा दाभोलकर अंधविश्वास के खिलाफ लड़ रहे थे। वे एक कानून बनाए जाने की मांग भी कर रहे थे। बकायदा एक वैज्ञानिक प्रयोगशाला बनाकर वह अंधविश्वास को गलत साबित करते थे। उनकी हत्या के पीछे हिंदू कट्टरवादी लोग थे। उन्हें डर था कि अगर ऐसा कानून बन गया तो वे धर्म और परंपरा के नाम पर लोगों को कैसे डराएंगे? दरअसर कट्टरवादी सोच का आधार ही दमन और दबाव है। धर्म और परंपरा का बिना सवाल उठाए पालन करो। जो ऐसा नहीं करते उन्हें बंदूक की गोली खानी पड़ती है। ‘मुक्तो मोना’ वेबसाइट पर साफ लिखा है हमारा उद्देश्य तानाशाही से मुक्त एक उदारवादी समाज की स्थापना है। अंधविश्वास, रूढि़वादी परंपराओं और धारणाओं से मुक्त समाज की स्थापना है। हम यह कोशिश करते रहेंगे। इस संदेश से साफ है कि अविजीत राय की मौत के बाद भी यह संघर्ष जारी रहा था। अनंता बिजाए दास के बाद भी जारी रहेगा।