एम्बुलेंस सेवा आखिर किसके लिये?

ज़िला सीतामढ़ी, प्रखण्ड रीगा, बथनाहा और सोनबरसा। गर्भवती महिलाओं को डिलेवरी के लिए एम्बुलेंस नहीं मिल रही है। फोन करने पर कभी तेल की कमी तो कभी एंबुलेंस न होने की बात कहकर मना कर दिया जाता है। ऐसे में औरतों को अपना किराया लगाकर अस्पताल जाना पड़ता है। इन औरतों को जननी सुरक्षा योजना का चैदह सौ रुपया तो मिला लेकिन गाड़ी भाड़ा नहीं।
सोनबरसा प्रखण्ड की माधुरी देवी ने बताया कि कुछ महीने पहले उनकी बहू को बच्चा होने वाला था। उन्होंने एम्बुलेंस के लिए फोन किया लेकिन वहां से जवाब में कहा गया कि एम्बुलेंस नहीं है। पी.एच.सी. वहां से करीब छह सात किलोमीटर दूर है। साढ़े तीन सौ रुपया किराया लगाकर वह अपनी बहू को ले गईं।
इसी तरह बथनाहा प्रखण्ड की रिंकू देवी, कौशल्या देवी ने बताया कि नज़दीक के मरीज़ तो जैसे तैसे चले जाते हैं, लेकिन दूर के मरीजों क्या करें? गर्भवती महिला को रिक्शा या फिर मोटरसाइकिल से ले जाना जोखि़म भरा भी होता है।
कौशल्या देवी ने बताया कि हाल ही की बात है मेरे पड़ोस की एक महिला को बच्चा होना था। एंबुलेंस को कई बार फोेन किया गया लेकिन वह नहीं आई। हार कर रिक्शे में बैठाकर ले जाना पड़ा।
अधिकारियों की मज़बूरी या लापरवाही
बथनाहा प्रखंड के स्वास्थ्य प्रबंधक आदित्य कुमार का कहना है कि यहां दो साल से एम्बुलेंस की सुविधा नहीं है। हम मांग भी करते हैं पर सुनवाई नहीं हाती है।
रीगा प्रखण्ड के चिकित्सा प्रभारी शिवशंकर प्रसाद का कहना है कि 102 नंबर की एम्बुलेंस है, लेकिन वह दस महीने से खराब पड़ी है।
तरियानी प्रखंड के चिकित्सा प्रभारी सुधीर कुमार ने कहा जब तेल का पैसा हमारे पास होता है तो एम्बुलेंस भेजते हैं। लेकिन जब नहीं होता तो क्या कर सकते हैं?
ज़िला चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर ओम प्रकाश पंजियार का कहना है कि बारह एंबुलेन्स हैं। नौ चालू हैं। हर प्रखंड में एक एम्बुलेंस है। गाड़ी भाड़ा के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से ऐसा कोई आदेश नहीं है जिसमें कहा गया हो कि गाड़ी भाड़ा मरीज़ को देना है।