यू.पी. की हलचल – आनलाइन सुविधाएं बेहतर मगर किसके लिए?

लखनऊ की वरिष्ठ पत्रकार सारा जमाल कई अखबारों के लिए लिख चुकी हैं।

तकनीक प्रेमी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का मानना है कि इंटरनेट से बेहतर ढंग से सरकार चलाने और पारदर्शिता लाने में मदद मिलेगी। लेकिन अभी भी ग्रामीण इलाकों के ज्यादातर लोग इंटरनेट चलाना नहीं जानते। बहुतों के पास अपने मोबाइल भी नहीं हैं।
1 मई यानी मजदूर दिवस के दिन एक वेब पोर्टल – सेवायोजन डॉट ओआरजी की शुरुआत उत्तर प्रदेश में हुई। यह वेब पोर्टल श्रम विभाग का है लेकिन इसमें संगठित और असंगठित क्षेत्र के उन मजदूरों के लिए कोई खास पहल नहीं है जिनके लिए मई दिवस मनाया जाता है। इस वेब पोर्टल में जहां पर नौकरी तलाशने वाले लोग अपना नाम दर्ज कर सकते हैं, वहां नाम दर्ज करने की प्रक्रिया बेकार साबित हो जाएगी क्योंकि इसमें राशन कार्ड नंबर भी रजिस्टर करना होगा। उत्तर प्रदेश में राशन कार्ड हासिल करने के लिए समाज में हाशिये पर पड़े लोगों को प्राथमिकता में रखा गया है। यह फार्म ऑनलाइन ही भरा जाएगा और इस पर फार्म भरने वाले का एकाउंट तभी बनेगा जब उसके पास मोबाइल हो। लखनऊ के गांधी भवन में रोजी रोटी अधिकार मंच के तहत हुई एक जनसुनवाई के दौरान ऐसे ही लगभग तीन सौ लोगों ने फॉर्म भरने के दौरान होने वाली परेशानियों को लेकर आपबीती सुनाई। वहां मौजूद लगभग हर भिखारी और साथ ही दिहाड़ी मजदूर और घरेलू नौकरों के पास फोन ही नहीं थे। उन्होंने बताया कि फॉर्म भरने के लिए काफी पैसे उन्होंने साइबर कैफे वाली दुकानों को दिए। ऐसे में यह फॉर्म भरना पारदर्शिता लाने का कम और साइबर कैफे वालों की कमाई का जरिया ज्यादा है।
इसके अलावा राज्य सरकार का एक और हालिया फैसला भी अजीब लगा। सरकार ने मशहूर उर्दू शायर मीर तकी मीर और मीर अनीस के पुराने और जर्जर मकबरों को वाई फाई यानी इंटरनेट की सुविधा देने का फैसला लिया। इन मकबरों की मरम्मत होनी है। सरकार का मानना है कि मुफ्त इंटरनेट देने से यहां आने वाले लोग इन शायरों और उनके योगदान के बारे में जानकारी आसानी से जान सकेंगे।