आओ चलें नन्हीं दुनिया

karvi 1जिला चित्रकूट और सतना, सुरेन्द्रपाल ग्रामोदय स्कूल। यहां नन्ही दुनिया मतलब छोटे बच्चों की दुनिया सन् 2006 से चल रहा है। नन्ही दुनिया में छोटे बच्चों को पढ़ाया जाता है। स्कूल की छुट्टी होने के बाद लोग घूमने के लिए जाते है। नन्ही दुनिया के भीतर घुसते ही मन खुष हो जाता है। यहां कई तरह के जानवर हैं।
सुरेन्द्र पाल ग्रामोदय स्कूल के हेड मास्टर मदन तिवारी का कहना है कि यहां लोग बड़ी दूर-दूर से घूमने आते हैं। नन्ही दुनिया नाम यह सोचकर रखा गया था कि छोटे बच्चों को जैसे गिनती ए.बी.सी.डी. का अक्षर जोड़, घटाना सिखाना है तो मिट्टी की गोली से सिखाया जाता है। जानवर के बारे में बताया जाता है जंगली जानवर कौन से हैं? भारत का नक्षा भी दिखाया जाता है। इस समय कुल दो सौ तिहत्तर बच्चे हैं। दलित और आदिवासी जाति के छप्पन बच्चों की फीस माफ है। घूमने वाले लोग अपनी खुषी से रूपये देते हैं, तो ले लिया जाता है वैसे तो रुपये किसी से नहीं लिया जाता है।