1988 में राजीव गाँधी द्वारा बनाई जाने वाली ग्लास फैक्ट्री बनने से पहले ही बंद हो गई|

जिला चित्रकूट, ब्लाक मऊ, गांव बरगढ़ उतर प्रदेश के पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गांधी 1998 मा ग्लास फैक्ट्री बनवावै का काम शुरु कराइन रहैं। या फैक्ट्री बनै से बहुतै मड़इन का आसरा रहैं कि हमहूं का रोजगार मिली। पै मड़इन का सपना पूर नहीं भा आय। काहे से फैक्ट्री का बजट न होय के कारन बंद कइ दीन गे।
बाबूलाल अउर सीताराम बताइन कि फैक्ट्री बनावै का सामान आ गा रहै। तेजी से काम भी शुरु कइ दीन गा रहै। मशीन भी आ गा रहैं। पै बजट न होय के कारन फैक्ट्री का काम बीच मा बंद कइ दीन गा रहै। फैक्ट्री का सामान चोरी होय के कारन 2002 मा ताला लगा दीन गा रहै। फैक्ट्री बनावै मा जउन मड़इन के जमीन लीन गे रहै उंई बहुतै परेशान हवैं।
जमीन के बारे में केसरी बतावत हवै कि बाप दादा के जमीन फैक्ट्री बनावै मा फंस गे। एक बीघा जमीन के 400 रुपिया बिगहा जमीन का मुआवाजा मिला रहै, पै वहिसे का होत हवै। हमार जमीन होत तौ खेती कइके कउनौ रोजगार कइ सकत रहेव।
संतलाल कहत हवै कि जमीन के हिसाब से मुआवजा नहीं दीन गा रहैं। फैक्ट्री भी नहीं बनी आय कि मड़इन का रोजगार मिलत। यहै कारन मड़ई दूसर जघा रोजगार खातिर जात हवै।
फैक्ट्री के देखभाल करै खातिर चार हवलदार लगाय गे हवैं। दरोगा महमूद का कहब हवै कि 14 बीघा जमीन मा फैक्ट्री बनी हवै। फैक्ट्री बनावै मा अरबों रुपिया लाग रहै। अबै भी करोड़न रुपिया का सामान बंद फैक्ट्री मा पड़ा हवै।
फैक्ट्री के सामान चोरी होइ जात रहै यहै के सुरक्षा खातिर हिंया इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश से पुलिस लगाई गे हवैं 2016 मा।

रिपोर्टर- नाजनी और सुनीता

16/09/2016 को प्रकाशित

इसके साथ ही लोगों की उम्मीदें भी टूट गई.