15 अक्टूबर को जब आप आराम कर रहे थे, उस दिन चुपके से महिला किसान दिवस बीत रहा था

जिला बांदा। मेहरिया किसान का पहिचान अउर हक देवैव खातिर 15 अक्टूबर महिला किसान दिवस मनावा गा है पै यहिके चर्चा कत्तौ देखाई नहीं पड़ी आय न कउनौ अखबार मा,न फेसबुक मा न वाटसाप ग्रुप्स मा।कृषि प्रधान देश खातिर या दिन खास आय।किसान फूला का कहब है कि मेहरिया किसानी का पूरा काम करती हैं पै जबै फसल बिकट है तौ वहिके खाता मा एकौ रुपिया नही डाले जात आहीं सुबेरे चार बजे उठ के घर का सब काम कइके खेत मा निराई गोड़ाई करे जात है फेर लउत के घर का सब काम अउर बच्चन के देखभाल करत है पै अबै तक मेहरिया का उनकर किसानी का हक नहीं मिला आय।
खबर लहरिया के डिजिटल हेड कविता बताइस कि गांवन मा ज्यादातर मेहरिया खेती काम करत है धान लगावै का काम भी मेहरिया करत है।भारत एक कृषि प्रधान देश आय पै हेंया मेहरिया का किसानी का बराबर  नहीं मिला आय।उमर दुर्रानी का कहब है कि समाज का स्वीकार करावें का पड़ी कि मेहरिया किसान का आर्थिक रूप से मजबूत करै यहिके खातिर मेहरिया का अपने काम से कुटीर उधोग धंधा करै का पड़ी जेहिसे  वा आर्थिक रूप से मजबूत होइ सकै।

खबर लहरिया ब्यूरो