हुदहुद तूफान ने मचाई तबाही, 84 मरे

फोटो साभार : southreport.com
फोटो साभार : southreport.com

विशाखापटनम, आन्ध्र प्रदेश। 12 अक्टूबर को ‘हुदहुद’ नाम के चक्रवात (तूफान) दक्षिण भारत के पूर्वी तट से आ टकराया। हालांकि सबसे प्रभावित राज्य आन्ध्र प्रदेश और ओदिशा इसके लिए तैयारी कर चुके थे, हुदहुद की तेज़ हवाओं ने तट पर स्थित कई गांव उजाड़ दिए। इस बवंडर का कुछ असर उत्तर प्रदेश और बिहार के मौसम पर भी पड़ा है।
6 अक्टूबर से भारतीय महासागर में बन रहे इस तूफान के लिए ओदिशा और आन्ध्र प्रदेश राज्य पहले से तैयार थे। कई तटीय गांवों को खाली करवाया जा चुका था। आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने बताया लगभग पांच लाख लोग इस समय राहत शिविरों में रह रहे हैं। 12 अक्टूबर को जब बवंडर के कारण सागर की बड़ी बड़ी लहरें विशाखापटनम शहर पहुंचीं, तब ज़्यादातर लोग खतरे के इलाके से बाहर थे। उस ही दिन राज्य सरकार ने उस इलाके की चालीस से ज़्यादा ट्रेनों को या तो रद्द कर दिया या उनके रूट बदल दिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक हज़ार करोड़ रुपए की राहत राशि का ऐलान किया है। वे खुद 14 अक्टूबर को नुकसान का मुआइना करने विशाखापटनम पहुंचे जहां उन्होंने अलग से मरने वालों के परिवारों को दो लाख और घायल लोगों को पचास हज़ार मुआवज़ा देने की घोषणा की।

नुकसान
– आन्ध्र प्रदेश में सौ करोड़ रुपए से ज़्यादा का नुकसान हुआ है – धान, मूंगफली और गन्ने की खड़ी फसलें नष्ट हो गईं। 38 जानवर मारे गए। कई इमारतों और बिजली के तार भी नष्ट हो गए।
– कई पेड़ जड़ से उखड़कर गिरे जिससे बिजली के तार टूट गए हैं। साथ में फोन लाइनें भी कुछ समय के लिए ठप रहीं।

हुदहुद का दूसरे राज्यों पर भी पड़ा असर
पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड राज्यों के मौसम पर तूफान का असर पड़ा। दो दिन में तापमान में गिरावट हुई। भारी बारिश से सूखाग्रस्त बुंदेलखंड के धान किसानों को बीज बोने का मौका मिला तो वहीं बाजरा की खड़ी फसलें नष्ट हो गईं। बिहार और उत्तर प्रदेश दूसरे हिस्सों में भारी बारिश में लगभग अट्ठारह लोगों के मरने की खबर है।

नेपाल। भारत के पास नेपाल देश के हिमालय पहाड़ों में हुदहुद के कारण अचानक भारी बर्फ गिरी। बर्फ के तूफान में पहाड़ की यात्रा कर रहे तीस से ज़्यादा लोगों के मरने की खबर है। एक सौ तीस और यात्रियों को नेपाली सेना ने हैलीकौप्टरों की मदद से उस इलाके से निकाला है। नेपाल के इस इलाके में चार से पांच मीटर मोटी बर्फ गिरी है।