हिम्मत से मिलत जिन्दगी

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नीधी

मुम्बई। आंख से ही जिन्दगी चलई छई, ऐकरा बिना दुनिया अन्हार हई। एकरा झुठ साबित कर देले छथिन मुम्बई के निधि।
खबर लहरिया पत्रकार से बातचीत के समय में उ अपन जिन्दगी से जुड़ल कुछ बात बतलथिन। निधि कहलथिन कि हमर बाबूजी बिल्डर(ठीका पर घर बनावे वाला) छथिन। हम तीन भाई-बहिन छी। हमर भाई भी सात साल के रहे तहिये उनकर आंख के रोशनी चल गेलई। हम भी जहिया दसवीं में पढ़ईत रही तहिया हमर उमर पंद्रह साल रहे तब डॉक्टर साहब बतलथिन कि धीरे-धीरे इनकर आंख के रोशनी खत्म हो जतई। कम दिखे के बाबजूद हम हिम्मत न हारली अउर बाईस साल के उमर में हमर आंख के रोशनी पुरा चल गेल अउर हमरा छड़ी उठावे परल। हमरा पेंटिग करे के शौक रहे पर हम समाज सेवी संस्थान में जुड़के काम करे लगली। चार साल पहिले प्वाइन्ट ऑफ़ व्यू में काम कईली। अभी लंदन में समाज सेवी संस्थान के लेल पढ़ाई करे गेल रहलीय। हम पत्रकारिता के पढ़ाई भी कयले छी। साथ ही मैगजीन अउर वेवसाईट के लेल लिखईत रहली। मराठी किताब के हिन्दी में अनुवाद भी करईत रहली। हम संगीत अउर भरत नाटयम् भी सिखले छी। हमरा नाटक देखे के शौक हय। हमर एगो बहिन त्वचा के डॉक्टर हय लेकिन केकरो शादी न भेल हई। निधि कहलथिन कि हम महिला अउर खास कर अपाहिज के लेल काम करब। अनका सब के इहो कहे के हई कि अगर आहा के पास हिम्मत हय तईयो जी सकई छी। आगे बढ़े के कोशिश कहियों न छोड़े के चाही। अकेले कोई अईसन न हई जिनका साथ समस्या हई। हर इंसान के साथ कोई न कोई समस्या जरूर हई।