हिम्मत की एक मिसाल

Mano - Arunima & Bachendri

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिला में रहने वाली छब्बीस साल की अरुनिमा सिन्हा सबके लिए एक नई मिसाल बन गई जब उन्होंने मई 2013 में सफलतापूर्वक दुनिया के सबसे ऊंचे पहाड़ माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई पूरी की। खास बात ये है कि अरुनिमा देश की पहली ऐसी व्यक्ति हैं जिन्होंने ये उपलब्धि एक पैर ना होने के बावजूद हासिल करी।
साल 2011 से ट्रेनिंग कर रही अरुनिमा 28 मार्च 2013 को नेपाल देश की राजधानी काठमांडू पहुंची। वहीं से 31 मार्च को तीस हज़ार फीट की ऊंचाई के माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई का सफर शुरू हुआ। लखनऊ में रहने वाले उनके भाई ओम प्रकाश ने बताया कि 21 मई को अरुनिमा ने ये चढ़ाई पूरी की। अरुनिमा अपने देश 1 जून को लौटेंगी। अरुनिमा को माउंट एवरेस्ट चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला – बचेंद्री पाल ने सहयोग और प्रोत्साहन दिया।

अरुणिमा के बारे में 

11 अप्रैल 2011 को अरुनिमा को गंभीर रूप से घायल हालत में शाहजहांपुर और बरेली रेलवे स्टेशनों के बीच रेलवे ट्रैक पर पाया गया था। अरुनिमा ने पुलिस को बताया था कि उनकी चेन खींचने की कोशिश करने वालों का विरोध करने पर उन लोगों ने उन्हें चलती ट्रेन से धक्का दे दिया था। पुलिस ने जांच तो की पर कोई हाथ नहीं लगा। दिल्ली के एम्स अस्पताल में महीनों इलाज के बाद जुलाई 2011 में उन्हें अस्पताल से छुट्टी तो मिली पर डाक्टर उनका बांया पैर नहीं बचा सके। कभी ना हार मानने वाली अरुनिमा अक्टूबर 2011 से ही पहाड़ चढ़ने की ट्रेनिंग में जुट गईं।