‘हादसे होते हैं, हम यहीं दफना देते हैं – और क्या करें?’

चित्रकूट जिला, ब्लाक रामनगर, गांव बरूवा 10 अक्टूबर का सुरपति के मरा बच्चा पैदा भा हवैं। काहे से बरूवा गांव से रामनगर अउर राजापुर गांव 15 किलोमीटर दूरी हवैं। जेहिसे मरीज लई जाय मा देरी होइ जात हवैं। अउर आय दिन इनतान के हादसा होत रहत हवैं।
सुरपति के मनसवा भोला बतावत हवै कि पहिले हम सुरपति का राजापुर लईगें रहैं, पै हुंवा से सोनेपुर खातिर रिफर कइ दीन गा रहैं। अपने साधन से सोनेपुर लई के आयें, तौ नर्स मरीज का देख के कहत रहैं। हिंया भर्ती न होइ, मरीज का जानकीकुण्ड लइ जाओ, चाहे इलाहाबाद लई जाओ। तबै हम पहाड़ी के नर्स शिवलता से बात करेन तौ वा इलाज करिस तबै मरा बच्चा पैदा भा हवैं। सुरपति का कहब हवै कि पहिले पेट पिरात रहै। बाद मा पीड़ा बंद होइगे रहैं। यहै कारन अस्पताल मा मोहिका भर्ती नहीं करिन हवैं। आशा बहु शकुन्तला देवी बताइस कि सुरपति के पांव फूल गें रहैं बच्चा पेट मा मर गा रहै। रामनगर मा अच्छी नर्स नहीं रहै। यहै कारन वहिका रिफर कइ दीन गा रहैं। बरुवा गांव के रंग नाथ सिंह अउर ब्रजेश कुमार बताइन कि हिया 6 साल पहिले सामुदायिक अस्पताल बना रहा हवैं। पै यहिमा आज तक कउनौ डाक्टर नर्स नहीं आवत हवैं। बुद्धवार का नर्स टीकाकरण करे आवत हवैं। राजापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डाक्टर गिरीश कुमार पाण्डेय का कहब हवै कि सुरपति का केस आवा रहै। पै वहिके कमजोरी देख के सोनेपुर रिफर कइ दीन गा रहै।

रिपोर्टर- सहोद्रा

19/10/2016 को प्रकाशित