हस्तकला बिखेर रही अपने रंग, इस वीडियो में देखिये चित्रकूट में बन रहे रंग बिरंगे गलीचे

जिला चित्रकूट, ब्लाक रामनगर, गांव देंउधा। हिन्दुस्तान के करीगरी दुनिया भर मा  नाम हवैं। चाहे वा लखनऊ के चिकनकारी हो चाहे मधुबनी के पेंटिंग का नाम होय। चारों कइत हस्तकला आपन रंग फइलावत हवैं। यहै मा एक नाम हवै गलीचा का जेहिमा रंग बिरंगे कपास के ऊनी सूत के फंदा बना के गलीचा बिना जात हव।मिर्जापुर अउर कश्मीर के गलीचा तौ तुम देखे होइहौं। आज देखौ चित्रकूट के गलीचा कसत बनत हवैं।हिंया का एक परिवार गलीचा बनावैं का काम करत हवैं।
गलीचा बनावै वाला राज कुमार गुप्ता बताइस कि बाहर गलीचा बनाव मा मजा नहीं आवत रहै तौ हम आपन गांव मा गलीचा बनावै का काम शुरू कइ दीने हौं गलीचा बनावै खातिर सरिया, चाकू, हथौड़ा अउर इंगल लागत हवैं अबै तक बीस हजार रुपिया लाग गे हवैं।मेहनत के हिसाब से समय लागत हवै ज्यादा मेहनत करै मा आठ दिन अउर कम मेहनत करे मा एक महीना तक समय लागत हवै।मिथलेश बताइस कि सरिया मा जब पूरा गलीचा बीन जात हवै तौ वहिका ठोंक के फेर काट के निकाल देइत हवै।फेर वहिके काटे का अउर धोवे का पड़त हवै।एक गलीचा पन्द्रह दिना मा बनत हवै अउर साढ़े सत्तरह सौ के बिकत हवैं। हम कोशिश करित हवैं कि आपन यहै रोजगार करी।
जबै बुन्देलखण्ड के मड़ई पलायन करत रहैं तौ राजकुमार आपन रोजगार हिंया करै के कोशिश करत रहै।

बाईलाइन-सहोद्रा 

Published on Nov 13, 2017