हर बार टूटते हैं कच्चे घर

lucknow kshetriyaजिला लखनऊ, ब्लाक गोसाईगंज, गांव कासिमपुर बिरूहा। यहां की ग्राम समाज और सरकारी चरागाह की ज़मीन करीब एक छोटी बस्ती में बदल चुकी है। कुछ लोग यहां मिट्टी की अस्थाई झोपडि़यां बनाकर रह रहे हैं। दूसरी तरफ गांव के लोगों के पास भी रहने के लिए अपने घर नहीं है।
दो साल पहले हुई बरसात में यहां के कई लोगों के घर गिर गए थे। सरकार ने इन लोगों के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं की। यहां की रमावती ने बताया कि तब से जैसे तैसे हम कच्चा घर बनाकर रह रहे हैं। हर बरसात में यही हाल होता है। कच्चे घर तो हर बार टूटते ही हैं। दो साल पहले तब के प्रधान कृपालाल ने लोगों को गांव की ज़मीन दी थी। तभी से झोपड़ी डालकर रह रहे हैं। यहीं की सविता ने बताया कि कच्ची मिट्टी के घर होने की वजह से कभी भी घर गिर जाते हैं। गांव के दूसरे लोगों ने बताया कि गांव के प्रधान महेष कुमार कालोनी के लिए लिख ले गये थे। लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।
ग्राम समाज की ज़मीन पर बनी झोपडि़यों के बारे में लेखपाल रमाकान्त ने बताया कि साल 1970 में बाढ़ आने के बाद अन्य इलाकों के लोग यहां आकर बस गए थे। तब से यहीं पर हैं। अब इन्हें कहां भगा दें? गांव वालों को सरकारी कालोनी मिले तो इसके लिए प्रधान को लिखकर देना होगा। प्रधान महेष कुमार ने बताया कि इस पंचवर्षीय में हमने सरकार से पांच सौ कालोनी की मांग की थी, जिसमें से सौ से भी कम मिलीं, जिन्हें गांव के लोगों को दिया जा चुका है।