हम तो जामुन खाते हैं लेकिन ललितपुर जिले के लोग जामुन की गुठली से अपना पेट पालते हैं

जिला ललितपुर, गांव छरपट  बरसात के मौसम में जामुन को तो मजा आप सबने लओ हुए और खाबे के बाद गुठली इते उते फेक देत।जिला ललितपुर, गांव छरपट  बरसात के मौसम में जामुन को तो मजा आप सबने लओ हुए और खाबे के बाद गुठली इते उते फेक देत। लेकिन छरपट गांव के आदमियन को जेई गुठलीयन से दो टेम की रोटी मिलत। जामुन तो मौसमी फल हे लेकिन का आदिवासीयन के लाने सरकार की तरफ से कोनऊ योजना नइ आत। उन्हें एसे ही लकड़िया और गुठली बेच के जीवन गुजारने परे का। अगर आत भी हे तो उन तक नइ पहुच पात काय के बड़े बड़े अधकारी बीच में ही खा लेत उनको हक़ और गरीब आदमी एसे ही करत अपनों गुजारो।  गजराज ने बताई के सबेरे चार बजे से निकर आत दिन भर बीनत फिर दो तीन दिन में सुखात बाके बाद फोर के बेचबे जात ललितपुर। तीन चार रुपइया किलो बिकती। फिर उते से सामान लिया हे तब फिर बना के खा पात। अपने मोड़ी मोड़ा पाल रए। राजकुमारी ने बताई के सुबेरे के बेच रए अबे तक सौ रूपइया के जामुन नइ बेच पाय और कछू काम हे नइया। शगुन और शीला ने बताई के हम तो जो काम जिन्दगी से करत आ रए और कछू हे नइया गरीबन के लाने आत कर्मचारी खा जात।

रिपोर्टर- राजकुमारी

19/07/2017 को प्रकाशित