स्वच्छता जरूरी लेकिन सोच में बदलाव भी जरूरी

01-10-14 sampaadakiya for web2 अक्टूबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में एक वाल्मीकि बस्ती में झाड़ू लगाकर स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की। 2 अक्टूबर को देश के बड़े नेता महात्मा गांधी की जन्मतिथि पर मोदी ने यह अभियान शुरू करते हुए देश के सभी लोगों से इसमें जुड़ने के लिए कहा। जब देश के प्रधानमंत्री सफाई, शौचालय और पीने के लिए साफ पानी की बात करते हैं तो लगता है कि आखिरकार हमारे नेता लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों के बारे में बात कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि स्वच्छ भारत अभियान को जमीन पर कैसे और किस सोच के साथ उतारा जाएगा?
मोदी ने अभियान की शुरुआत एक वाल्मीकि बस्ती में की लेकिन सफाई करने की जिम्मेदारी सिर्फ इस समुदाय के लोगों की नहीं है। यह बड़े मुहल्लों और सरकारी कालोनियों में रहने वाले मध्यम वर्ग के लोगों की भी है। यह भी जरूरी है कि सफाई घरों और सड़कों तक सीमित न रहे, हम अपना पर्यावरण भी स्वच्छ रखें। मोदी की भाजपा सरकार पर्यावरण को लेकर कुछ कानूनों में ढील दे रही है जिसकी वजह से यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या लम्बे दौर में सरकार पर्यावरण को स्वच्छ रखना चाहती है या नहीं? जहां सफाई हम सबको पसंद है वहीं सफाईकर्मियों की स्थिति के बारे में कम ही लोग सोचते हैं। वाल्मीकि और कई और जाति के लोग अभी भी कई जगह छुआ-छूत का सामना करते हैं। क्या यह स्वच्छता अभियान हमारे मन में बसी भेद- भाव की गंदगी को साफ कर पाएगा? अगर यह अभियान इन सभी सवालों का जवाब दे सकता है तो यह वाकई में देश को स्वच्छ बना सकता है।