स्टेशन पै अनाज बटोरत मेहरारू

taza1 finalजिला फैजाबाद, रेलवे स्टेशन। हिंआ बाहर से मालगाड़ी से राशन आवाथै। स्टेशन के पास कै कुछ मेहरारु नीचे गिरे राशन का बटोर के आपन जीवन यापन कराथिन।
मुरादाबाद से आई मीरा बताइन कि जवन राषन बाहर से आवाथै वका उतारै कै काम करीथी। गाड़ी मा जवन बोरा से गिरा रहाथै वका बटोर के बोरा मा भर जाथै। तबौ कुछ मजदूरी नाय मिलत। जब पूरा राशन गाड़ी से लद के गांव गांव चला जाथै तौ हमरे सब नीचे मिट्टी मा गिरा गेहूं, चावल बटोर के लै जाईथी। अगर हिंआ कै मनई देखाथिन तौ नाय लै जाय देतिन। काफी मेहनत करै के बाद तब बनावै खाय लायक हुआथै।
लगभग सात मेहरारू गेहूं बटोरत रहिन बताइन कि यही से हमरे सबकै जीविका चलाथै। जब राषन उतराथै तौ हिंआ काफी राशन नुकसान होय जाथै।
आये दिन स्टेशन पै अनाज कै बर्वादी हुआथै। अउर जब गांव-गांव बंटै के ताई जाथै तौ कम होय जाथै। हिंआ जवन राषन गिरा रहाथै चाहै स्टेषन पै पड़ा सड़ जाए लकिन केहूं लै नाय जाए सकत। यहिं गेहूं चावल मा यतना कंकड़ मिट्टी रहाथै कि एक दिन बटोरै दस दिन तक साफ करै का पड़ाथै। लकिन सब सोंचाथिन कि बिना मेहनत का हुआथै।