सेहतमंद मां और बच्चा – नहीं सुनी जा रही आशाओं की मांग

(फोटो साभार: विकिपीडिया)
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जिला चित्रकूट। जिले में 23 अगस्त 2005 को राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत आशाओं की नियुक्ति की गई थी। जिले में 767 आशाएं हैं लेकिन पिछले एक साल से इन्हें मानदेय नहीं मिल रहा है। आशाओं की पहचान निश्चित करने के लिए उन्हें एक आई डी नम्बर देने की बात भी हुई थी लेकिन अब तक नहीं मिला। इन सभी मांगों को लेकर आशाओं ने 22 फरवरी और 3 मार्च 2014 को धरना किया। 16 जनवरी 2014 को लगभग दो सौ आशाओें ने दिल्ली में धरना प्रदर्शन किया। मऊ और पहाड़ी ब्लाक की आशा विनिता, सुनीता, उर्मिला, कमलेश ने बताया कि हमें एक वर्ष से मानदेय नहीं दिया गया है। मानिकपुर और कर्वी की आशा गीता, सुनीता, सुमन ने बताया हमसे जुलाई 2013 में लखनऊ स्वास्थ्य विभाग कि तरफ से आई डी देने देने का वादा किया गया था। पर, अब तक नहीं मिला। मानदेय देते वक्त विभाग हमसे आई डी नंबर की मांग करता है। रामनगर ब्लाक की आशा सन्तोष, जमुना, आशा देवी, जानकी सावित्री ने बताया 2009 से मानदेय बढ़ाने की केवल बात ही हो रही है। सी.एम.ओ. वेद प्रकाश का कहना है कि आशाओं की मांग प्रधानमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री तक पहुंचा दिया गया है।

आशाओं की मांग.आशाओं को अपने इलाके से दूसरे इलाके में गर्भवती महिला को लेकर जाने.आने वाले खर्च की रकम मिलनी चाहिए। आशाओं को प्रति माह पांच हजार रुपए मानदेय मिले। आशाओं को ड्रेस भी मिलनी चाहिए। मोबाइल दवाए किट और रुकने का इंतजाम होना चाहिए।
आशा के काम.गर्भवती महिलाओं का समय से टीकाकरण करनाए आयरन की गोली तीन माह तक दिलाना। प्रसव के समय गर्भवती महिला को स्वास्थ्य केन्द्र ले जाने की व्यवस्था करना एवं अस्पताल में ही प्रसव कराने के लिये प्रेरित करना। बच्चा होने के बाद महिला को घर तक सुरक्षित पहुंचाना। गांव में महिलाओं को नदबंदी कराने के लिये स्वास्थ्य केन्द्र ले जाना। अगर नसबंदी कराने के बाद महिला को कुछ दिक्कत या फिर गर्भवती होती है तो उसको मिलने वाला लाभ दिलाना। जीरो से पांच साल तक के बच्चे का टीकाकरण कराना।