सेहतमंद मां और बच्चा- नहीं मिलत पोषाहार

जिला चित्रकूट, ब्लाक रामनगर, गांव सिकरी। हिंया के कुछ लोगन का कहब हवै कि आंगनबाड़ी केन्द्र सरकार या सोंच के खोलवाइस रहै कि छोट छोट बच्चा केन्द्र मा जइहैं। बच्चन, गर्भवती मेहरियन किशोरी अउर धात्री मेहरियन का पोषाहार केन्द्र से मिली। या सबै बस नाम खातिर बनके रहिगा हवै। अगर यहिके खातिर आंगनबाड़ी से कहा गा, पै वा कहत हवै कि सरकार जउन भी पोषाहार देत हवै। वा बच्चन का दीन जात हवै।
गांव के संगीता, सुलेखा अउर मालती का कहब हवै कि हमरे बच्चा आंगनबाड़ी केन्द्र जात हवैं। उनका कुछौ पढ़ावा नहीं जात हवै। न तौ केन्द्र मा पंजीरी मिलत हवै। अगर बच्चन से कहा जात हवै कि केन्द्र मा जाव तौ उंई कहि देत हवैं कि का करिबे। हुंवा से खाली हाथ लउटै का परत हवै। या तौ रहि बच्चन के बात यहिनतान गर्भवती मेहरियन, किशोरिन अउर धात्री मेहरियन का भी पंजीरी नहीं मिलत हवै। हम गरीबन के बच्चन का पोषाहार मिलै तौ थोइ नींक रहै।
आंगनबाड़ी शीला देवी का कहब हवै कि केन्द्र मा पंजीरी बांटी जात हवै। मड़ई यहिनतान कहत हवै तौ यहिके खातिर का कीन जा सकत हवै।

नियम
– सरकार की तरफ से मौसमी फल, मीठा दलिया और पंजीरी बांटी जात हवै।
– एक बच्चे को रोज 70 ग्राम दलिया और एक सौ बीस ग्राम पंजीरी।
– धात्री, गर्भवती मेहरियन का एक सौ चालिस ग्राम पंजीरी प्रति सप्ताह।
– किशोरी का एक सौ पचास ग्राम पंजीरी दीन जात हवै।