सूखी नहरें, पलेवा को परेशान किसान

09-10-14 Kshetriya Banda - Sookhi naharजिला बांदा। यहां की कई नहरें सूखी पड़ी हैं। यह समय खेती के पलेवा का चल रहा है। अगर नहरंे चालू नहीं होगी तो रबी की फसल भी किसान नहीं बो पाएंगे। किसानों ने अक्टूबर 2014 में जिला अधिकारियों से नहरें चालू कराने की मांग की है।
ब्लाक बबेरू,गांव पतवन। यहां ंके किसान बालगंगाधर, रामदत्त और सुरेश बताते हैं कि हमारे यहंा बबेरू ब्रांच नाम की बड़ी नहर निकली है। यह नहर एक साल से सूखी पड़ी है। इस नहर से लगभग दस हज़ार बीघा खेतांे की सिंचाई होती है। यह नहर बरौली, मन्ठा, काजीटोल, समसद्दीपुर सहित बीस गांव को जोड़ती है। बारिश भी नहीं हुई और नहरों में पानी नहीं छोडा़ जा रहा है तो कहां से फसल की बोआई करें।
ब्लाक नरैनी, गांव तुर्रा,महुटा और पौहा। यहां के किसान पप्पू और अशोक ने बताया कि हमारे यहां की महुटा रजबहा और बसरेही माईनर नाम की नहरंे दो माह से सूखी हैं। हजारों बीघा जमीन पलेवा के लिए पडी़ है। नहरें चालू करवाने के लिए 7 अक्टूबर को अतर्रा तहसील दिवस में दरखास दी है। पर नहरंे अभी भी सूखी हैं। खेती का पलेवा नहीं होगा तो चना, लाही, मसूर और गेहूं की फसल भी नहीं बो पाएगंे।
बड़ोखर ब्लाक, गांव जमालपुर। यहां के दस किसानों ने बताया कि कैनाल नहर चालू न होने से धान की खेती सूख गई है। रबी की फसल भी पिछड़ रही है।

केन नहर प्रखण्ड के अधिशाषी अभियंता ओ.पी. मौर्या का कहना है कि जिले में दो सौ नौ नहरंे हैं। बरियारपुर बांध व गगउ बांध से खरीफ की फसल के लिए पानी दिया जाता है। और रनगवां बांध से रवी की फसल के लिए पानी दिया जाता है। रनगवां से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनांे पानी लेते है। पानी बंटवारे की बैठक होगी उसके बाद नवंबर में पानी छोड़ा जाएगा। रनगवां में 5800 एम.सी.एफ.टी. की जगह 2444 एम.सी.एफ.टी. पानी है। जो बहुत ही कम है। इस पानी से सिर्फ पांच दिन नहरें चल सकती हैं।

अतर्रा नहर विभाग के सहायक अभियंता पी.डी. मिश्रा का कहना है कि एक हफ्ते से नहरें सूखी पड़ी हैं। पानी नहीं है तो कहां से छोड़ा जाए। इस महीने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर बैठक की जाएगी। मध्य प्रदेश के बरियार बांध से सिंचाई के लिए पानी कीे मांग की जाएगी।