सीमाएं लांघती मीडिया

चुनाव शुरू होने में दो चार दिन ही हैं। सारी सीमाओं को तोड़कर उत्साही मीडिया किसी नेता की छवि बनाने तो किसी की बिगाड़ने में लगी है। इसका सबसे अच्छा उदाहण मीडिया में आम आदमी पार्टी और भाजपा के बारे में आ रही खबरें हैं। भाजपा की रैलियां जहां बिना काटे ज़्यादातर चैनलों में आधे-आधे घंटे तक चल रही हैं। वहीं आम आदमी पार्टी की रैली के केवल उसी हिस्से को दिखाया जा रहा है जिसमें उनका विरोध हो रहा है।
हाल ही में अखबारों और चैनलों ने बिना जांच पड़ताल कहा कि बनारस में लोगों ने अरविंद केजरीवाल पर अंडे और स्याही फेंके। जबकि सच्चाई बहुत अलग है। पूछताछ करने पर पता चला कि जनता ने ऐसा नहीं किया है। यह भी पता चला कि अंडे और स्याही फेंकने वाले लोग एक खास पार्टी के पक्ष में नारे भी लगा रहे थे। साफ है वह लोग किसी राजनीतिक पार्टी के थे। उधर, मोदी गुजरात के विकास मॉडल पर जो भी बोलते हैं, वह खबर बनता है।
ज़्यादातर मीडिया गुजरात जाकर वहां की हकीकत नहीं दिखा रही है। अगर पहुंच भी रही है तो केवल शहरों तक। हाल ही में सूचना के अधिकार के जरिए एक रिपोर्ट सामने आई। गुजरात के विकास की पोल खोलती इस रिपोर्ट के अनुसार यहां पांच साल से कम उम्र के पैंतालिस प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। सत्तर प्रतिशत बच्चों में खून की कमी है। तीस प्रतिशत घरों में पीने का पानी नहीं है। लेकिन इस रिपोर्ट को हाथ में लेकर कोई चैनल नहीं चिल्लाया। अखबारों में इसका गंभीर विश्लेषण नहीं हुआ। मीडिया का काम किसी नेता या किसी पार्टी के पक्ष या विपक्ष में खबरें चलाना नहीं बल्कि जमीनी सच्चाई लोगों तक पहुंचाना है।