साल बीत गया, हालात वही रहे बाँदा जिले के पंडुई गाँव में आश्वासन के बाद भी नहीं हुआ काम

जिला बांदा, ब्लाक बड़ोखर खुर्द, गांव पंडुई। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, सभी राजनीतिक दल विकास की लम्बी-लम्बी सूचियाँ बनाकर चुनावी दावे कर रहे हैं। पर इस विकास की जमीनी हकीकत क्या है, अगर आप ये जानना चाहते हैं, तो बुंदेलखंड के बांदा के पंडुई गांव का किस्सा सुनें। पिछले साल 13 जनवरी को इस गांव में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन आए थे और गांव में चौपाल भी लगाई थी। गांव के लोगों की समस्या सुनी और उसका समाधान करने की बात कहते हुए गांव में बिजली, पानी, सड़क, इंटर कॉलेज का निर्माण, किसानों की समस्या का हल और स्वास्थ्य सुविधा देने के साथ लोगों की व्यक्तिगत समस्याओं को भी पूरा करने का वादा किया था।

पर आज एक साल गुज़र जाने के बाद उनके वादे अभी भी वादे ही हैं। खबर लहरिया ने पंडुई गांव में तीन बार रिपोर्टिंग की, पहली बार मुख्य सचिव के आने से पहले, दूसरा उनके दौरे के एक महीने बाद और तीसरा दौरे के एक साल गुज़र जाने के बाद, जिसमें हमने विकास और उसकी असलियत की सच्ची तस्वीर  दिखाई थी।

तो बात करते हैं, पहली रिपोर्टिंग की जब 12 जनवरी 2016 को पंडुई गांव में सड़क निमार्ण का काम जोरशोर से चल रहा है। 10 जनवरी से गांव के सड़कों के ऊपर डमर डाला जाता हैं। सड़क को सिर्फ मुख्य सचिव को दिखाने के लिए ही तैयार किया जाता है। गांव के पूर्व माध्यमिक विद्यालय का कायाकल्प किया जाता है, जिसमें विद्यालय की पुताई का काम शुरु किया जाता हैं, साथ ही 3 दिन में शौचालयों का निर्माण कराया जाता है। इस विद्यालय में उस समय 2 अध्यापक और 1 प्रधाना अध्यापक थे, पर मुख्य सचिव के आने दूसरे विद्यालयों से 5 अध्यापकों को इस विद्यालय में नियुक्त किया जाता है। गांव की सालों से भरी नालियों को भी साफ किया जाता है। विद्यालय का नल ठीक किया जाता हैं। गांव को आदर्श गांव बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।

 

खैर सचिव के जाने के बाद की दूसरी रिपोर्टिंग में जब हम 11 फरवरी 2017 को पंडुई गांव में गए तो सबसे पहले तो हमें सड़क ने ही अपना हाल बता दिया। सड़क टूटने लगी। विद्यालय में बने शौचालयों के दरवाजे में ताले लग गए थे, जैसे अब ये ताले किसी दूसरे बड़े नेता या अधिकार के आने का इंतेजार कर रहे हो। गांव के लोग उनके जाने के अब गांव में अच्छे बदलाव की उम्मीद की राह ताक रहे हैं।

तीसरी रिपोर्टिंग में जब हम पंडुई गांव में गए तो जल्दबाजी में किया गया विकास खत्म हो गया है।

गांव के लोग पूर्व मुख्य सचिव के वादे खोखले होने की बात कहते हैं। बी.डी.सी सदस्य अमितेंद्र कहते हैं, “इण्टर कॉलेज की स्थापना करने की बात कही थी। पर अब तक विद्यालय बनने की दिशा कोई काम नहीं हुआ है।” गांव के प्रधान पति रज्जू कहते हैं, “उनके आने पर इण्टर कॉलेज, शमशान घर और बारात घर बनाने की मांग की गई थी।”

पंडुई गांव में रहने वाले कामता उस समय गांव में सफाई होने की बात कहते हैं। वह कहते हैं, “अभी तो कोई हैण्ड पम्प खराब होने पर महीनों तक कोई ठीक करने नहीं आता है।”

वहीं परचून की दूकान चलने वाले चुनभान यादव पानी देने की बात कहते हुए बोलते हैं कि पानी की समस्या है, पर अभी भी हम पियासे ही है।

70 साल की सुशीला बदलाव आने की बात पर भड़कर बोलती हैं, राशन की दूकान से अनाज तक तो मिल नहीं रहा। सुशीला की तरह ही कमला को भी बारात घर की आस थी, पर बारात घर का अभी भी कुछ अता-पता नहीं है।

गांव में जो शौचालय बनाए गए थे, वे आज पत्थर और ईटों से भरे हुए हैं। पूर्व माध्यमिकी विद्यालय में जाने पर दो बच्चे कक्षा में मिलते हैं, जिनका नाम पुरुषोत्तम और राहुल हैं। उनसे कक्षा के ब्लैक बोर्ड में लिखी दिसम्बर महीने की तारीख के बारे पूछते हैं कि तारीख क्यों नहीं बदली गई तो वे तपाक से कहते हैं कि नहीं पढ़ाते हैं तो क्यों बदलेंगे। अध्यापक बैठे रहते हैं, हम भी नहीं पढ़ते हैं और खुद से कुछ न कुछ कर लेते हैं। हालंकि बारात घर के लिए जमीन ले ली हैं, पर उस पर काम कब होगा ये इसका जवाब कोई नहीं दे पाता है।

रिपोर्टर- मीरा देवी

17/01/2017 को प्रकाशित