साल नया, उम्मीद नई

नए साल में औरतें क्या चाहती हैं? पहली बार प्रधान बनी श्रेया सिंह क्या चाहती है? या फिर चैथी बार प्रत्याशी रहने वाली मुन्नी देवी की 2016 से क्या उम्मीद है? 20 साल की प्रधान निरोधना क्या चाहती है या असाक्षर प्रधान अनारकली की क्या उम्मीद है? नए साल की कगार पर खबर लहरिया ने अलग अलग महिलाओं से बात की यह जानने के लिए कि 2016 के बारे में उनका क्या सोचना है। स्वास्थ्य स्कूल स्वच्छता बराबरी पितृसत्ता का अंत या विकसघत्रद्ध

sunita piprahaपिपरिहा की निडर ग्राम सदस्य, सुनीता

पिपरिहा गाओं, मऊ ब्लॉक। जब सुनीता चुनाव लड़ने को खड़ी
हुई तो कई लोगों ने विरोध किया क्यूंकि वह पाल जाति से
थी| परिवार के लोग कह रहे थे कि हमारे घरों की औरतें
राजनीती में नहीं आ सकती हैं और हमारे गाँव का नाम डूब
जाएगा पर वह चुनाव लड़ने से पीछे नहीं हुई।
2016 से उम्मीदः मैं अपने गाँव के विकास के लिए काम शुरू
करूंगी। जनवरी 2016 में सबसे पहले अपने गाँव में सड़क
और खड़न्जा बनवाने कि लिए प्रधान से कहूँगी और खूब विकास करवाऊँगी|

 

usha red brigadeरेड ब्रिगेड सांस्था की उद्यमी ऊषा विष्वकर्मा

जिला लखनऊ। यहां कि ऊषा विष्वकर्मा रेड ब्रिगेड
नाम की संस्था चलाती हैं। जिसमें लड़कियों को
आत्म रक्षा करना सिखाया जाता है।
2016 से उम्मीदः आने वाले साल को लेके हम
बहुत उत्साहित हैं और हमारी उम्मीद है कि 2016
में हर चैराहे पर महिला शौचालय हो। क्यूंकि
उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी समस्या शौचालय की
है। अगर महिला कहीं बाहर निकलती है और
उसे रास्ते में षौच या बाथरुम जाना हो तो उसे
कोई सुनसान जगह ढूंढनी होती है। इसी से इतने
अपराध भी होते हैं।

 

vani shuklaवाणी शुक्ला, सेवा संस्थान की बहादुर अध्यक्ष

जिला फैजाबाद। वाणी ने सेवा संस्थान का काम 2014
से शुरू किया। वह खुद विकलांग हैं। उन्होंने
बचपन से पढ़ाई लिखाई और कई मोड़ पर काफी
दिक्कतों का सामना किया है। इसलिए उन्हें लगा
कि अगर वह विकलांग बच्चों के लिए कुछ कर सकती
हैं तो अच्छा होगा। कम्प्यूटर ट्रेनिंग, कराटे, पेंन्टिग, जैसे कई हुनर सिखाये जाते है।
उनके यहां सत्तासी बच्चे हैं। जो कम्पटीशन के लिए
बाहर भी जाते हैं और पुरस्कार भी जीत कर आते हैं।
वाणी शुक्ला जी को दो सालों में दो पुरस्कार भी मिल चुके हैं।

पुष्पा, वनांगना संस्था की वरिश्ठ नारीवादी कार्यकता 

जिला चित्रकूट। वनांगना संस्था की नेतृत्व समूह की वरिश्ठ कार्यकर्ता पुष्पा का कहना है कि 2016 सबके लिए खुशी अैर उमंग भरा हो। वनांगना चित्रकूट और बाँदा जि़लों में ग्रामीण विकास और महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोकने पर काम करते है
2016 से उम्मीदः संस्थागत काम के तहत नये साल में दलित महिलाओं द्वारा हिंसा और साम्प्रदायिकता के खिलाफ चल रही लड़ाई को बहुत आगे ले जाएं। वनांगना की समझ और सोच को आगे बढ़ाये। यह काम चित्रकूट और बांदा तक ही सीमित न रहे। अपने काम को और जिलों में फैलाएंगे।

babita singhबबिता सिंह, 1090 की वीर एस.पी

जिला लखनऊ। बबिता बताती हैं कि शादी के छह
साल बाद ही उनके पति कि मौत हो गई। उसके
कुछ दिन बाद ही उनकी पुलिस की जो परीक्षा
दी थी उसका परिणाम आ गया। उनके लिए ये
बहुत ही कठीन समय था। दोनों बेटियां छोटी थी।
लेकिन अब दूसरों की समस्या सुलझाते हुए उन्हें
बहुत अच्छा लगता है। उन्हें इस साल (2015) उनके
काम के लिए सम्मानित भी किया गया है। ऐसे में
उनसे लोगों की उम्मीद भी बढ़ गई है। वो चाहती
हैं कि उस उम्मीद पर खरी उतरें और अपना हर
काम ईमानदारी से करें।
2016 से उम्मीदः मैं खुद को हिम्मत से खड़ा रहने
और अपने बच्चियों को भी समय देना चाहती हैं। मुझे लोगों से भी उम्मीद है कि आने वाले समय में वे लिंग भेद को मिटाएं।

anarkaliअनारकली चांदपुरा की बानी प्रधान… फिर से

चांदपुरा, महोबा। अनारकली कहती है कि वह एक भी पढ़ी
लिखी नहीं है क्योंकि उसके मायके की स्थिति ज्यादा अच्छी
नहीं थी। फिर वह अपने ससुराल में पति, परिवार और गांव
के सहयोग से दुबारा प्रधान बनी हैं। जिसमें 15 लोग इस
बारी चुनाव में खडे़ थे। सबको हराते हुए, वह 120 वोटों से
जीती है। उनका चुनाव निशान अनाज उगाता हुआ किसान
था। वह प्रधान बनने के बाद भी खुद खेती किसानी का काम
करती है।
2016 से उम्मीदः मैं गांव में पानी समस्या दूर करने के लिये
टंकी बनवाऊंगी , और लड़कियों के लिये हाई स्कूल और
इंटर कालेज की मांग करूंगी। मैं नहीं पढ़ी तो मेरी उमर तो
जैसे भी कट रही है पर बच्चों का भविष्य अंधेरे में नहीं रखना
चाहती हूँ। गाँव के लोग लड़कियों को पढ़ने के लिए महोबा
नहीं भेजते हैं। खुद की साइकिल से जाने पर एक्सीडेन्ट आटो और बस छेड़खनी के जैसे
कारणो का लड़कियो को सामना करना पड़ता है। इसके अलावा मैं सूखा से निपटने के लिये
भी जिले में बैठे अधिकारी और सचिव के सहयोग से काम करवाऊँगी। साफ सफाई, सी-सी-
रोड और मनरेगा में ज्यादा से ज्यादा काम करवाऊँगी।

जुझारू ग्राम प्रधान मुन्नी देवी

बनवारीपुर गाँव, कर्वी ब्लॉक। प्रधान मुन्नी देवी को प्रधानी पद मिलना सबसे खुशी वाली बात थी। इससे पहले वह तीन बार प्रधान पद का चुनाव लड़ चुकी थी लेकिन भाग्य साथ नहीं दिया। वो चौथी बार चुनाव लड़कर जीती हैं
2016 से उम्मीदः नये साल में उम्मीद है कि विकास कराके जनता को खुश रखूंगी उसकी सेवा करुंगी। क्यूंकि मैंने चुनाव जीतने के लिये संघर्ष किया है। जनता ने भी मेरा साथ दिया है। इससे बडी खुशी और क्या हो सकती है।

अट्ठावन में भी सदाबहार, प्रधान शगुन

ब्लाक मऊ, कस्बा बरगढ। यहां की प्रधान शकुन बताती है कि मेरी उम्र लगभग अंठावन साल है। उन्होंने प्रधान के चुनाव में जीत हासिल की है।
2016 से उम्मीद: नए साल में गांव का सर्वे करा के विकास किया जायेगा। सबसे पहले कोलहाई मजरा में स्कूल बनवाने का काम करना है। गरीब लोगों की जमीन का पट्टा करवाया जायेगा। उम्मीद है कि 2016 में यह काम पूरे हो जायेंगे।