सांसद गांव गोद लें तो समझो गांव हुए अनाथ

आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत बांदा, चित्रकूट, और महोबा के तीन ऐसे गांव हैं जिन्हें सांसदों ने गोद लिया हुआ है। इन गांवों को देख कर लगता नहीं है कि इन्हें सरकारी सुविधाएँ मिली भी होगी। इन्हें देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि जमीनी रूप से काम न के बराबर है जबकि कागजों में यह गांव समृद्ध गांव कहलाते हैं। यहाँ की मूलभूत समस्याएं जिनमें स्कूल, शौचालय, सड़क, बिजली, राशन आदि लगातार बनी हुई हैं।
खबर लहरिया की सीनियर रिपोर्टर गीता कटरा कालिंजर गांव में पहुंची जिसे सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा ने 3 साल पहले आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत गोद लिया हुआ है। गांव के हालात बता रहे हैं कि सांसद भैरों प्रसाद ने कागजी विकास किया है जबकि जमीनी विकास के नाम पर लोग परेशान दिखाई दे रहे हैं।
गांव निवासी राधा ने बताया कि हमें कहा गया था कि शौचालय बनेगा और यह कह कर प्रधान ने गड्ढा खुदवा दिया और फिर बाद में कहा कि खुद बनवा लो, पैसा खाते में आ जायेगा। लेकिन अभी तक कोई पैसा नहीं आया, न कोई सरकार की तरफ से जांच के लिए आया है।
सुजात हुसैन सरकारी स्कूलों की शिक्षा के बारे में बताते हुए कहते हैं कि यहाँ बच्चे केवल खाना खाने आते हैं, बस्ता और ड्रेस लेने आते हैं। इसके अलावा न यहाँ पढ़ाई है और न ही शिक्षक। सांसद जी ने योजना तो बहुत अच्छी बनायीं लेकिन यदि उसका आधा भी गांव के लिए कर दें तो शायद यह गाँव आदर्श गांव बन जाये।
इस गांव में कालिंजर किले के नाम से एक एतिहासिक किला भी है। माना जाता है कि दसवीं शताब्दी के इस किले को बादशाह अकबर ने अपने प्रिय मंत्री बीरबल को जागीर के रूप में दान किया था। लेकिन देखभाल ना होने के वजह से यह किला अब बस एक खंडर है जहाँ डकैत छुपा करते है। यह किला गांव की धरोहर है लेकिन इसका भी वही हाल है जो बाकी के गांव का हाल है।
यह दशा सिर्फ इस गांव की नहीं है बल्कि भैरों प्रसाद के द्वारा एक दूसरे अन्य चित्रकूट जिले के ब्लॉक रामनगर में हन्ना विनौक गांव का भी यही हाल है।
खबर लहरिया की रिपोर्टर सहोद्रा की रिपोर्ट के अनुसार, गांव में महिना भर पहले कुछ घर गिर गये थे जिनमें तीन लोगों की मौत भी हो गयी। इस बात की जानकारी प्रधान को देने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं की गयी।
इस बारे में सांसद भैरों प्रसाद का कहना है कि यह काम जल्द हो जायेगा। कुछ महीनों पहले ही योजना बनायीं गयी थी जिस पर काम चल रहा है। कोशिश है जल्द सभी सुविधाएँ गांव को मिल जायेंगी।
जबकि इस बारे में गांवनिवासी राजेंद्र कुमार का कहता है कि छोटे-छोटे गांव में जाकर देखिये क्या विकास हुआ है। यहाँ तो पानी की टंकी भी नहीं है। गांव की इस हालात को देख कर रोना आता है अब। प्रधान ने स्कूल की जमीन भी खा ली। सांसद ने कुछ नही किया यहाँ, बल्कि हालात और ख़राब कर दी है।
जब सरकार अपने कहने के बाद भी गांवों को नज़रअंदाज़ करती जायें तब जाहिर है कि गरीब लोगों के पास पलायन के अलावा कोई भी चारा नहीं रह जाता।
महोबा जिले, ब्लाक कबरई, श्री नगर थाना क्षेत्र के पिपरामाफ गांव को 3 साल पहले सासंद पुष्पेंद्र सिंह चन्देल ने गोद लिया था। यहाँ के हालात भी पिछले अन्य गांवों जैसे ही मिले। यहाँ पांचवी के बाद स्कूल नहीं है, साफ़ पानी नहीं है, बरसात में आना-जाना मुमकिन नहीं है। नतीजन, यहाँ कई लोग अपने घर छोड़ कर कस्बों में, बड़े शहरों में अपनी आजीविका ढूंढ रहे हैं।
गांवनिवासी जगदीश ने बताया कि हमें लगा था कि गांव को अब बुनियादी सुविधाएँ तो जरुर मिल जायेंगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। यहाँ शादियाँ नहीं हो रही।
गांव के प्रधान रामबरोही कुशवाह मूल सुविधाओं को अनदेखा कर गांव में हरियाली, बांध, नदियाँ-नालों की बात करते हैं। उनके लिए लोगों की समस्याएं जरुरी नहीं बल्कि गांव के सुन्दर दृश्य मायने रखते हैं।
इस बीच सांसदों से बात करने की कोशिश लगातार जारी रही लेकिन कभी उनके पास समय नहीं था तो कभी वह बात करना नहीं चाहते थे।
इन सभी बातों और जमीनी हकीकत हो देखते हुए कहा जा सकता है कि आदर्श ग्राम योजना के नाम बड़े हैं लेकिन दर्शन छोटे। हमने तो बस ये जाना है कि गांव को जैसे ही सांसद गोद लेते हैं वो गांव हमेशा के लिए अनाथ हो जाता है।

रिपोर्टर- गीता, सहोद्रा और सुनीता प्रजापति 

27/06/2017 को प्रकाशित