सहारनपुर में भड़के साम्प्रदायिक दंगे, दलितों के 25 घर फूंके

साभार: विकिमीडिया कॉमन्स

सहारनपुर में 5 मई को महाराणा प्रताप की जयंती पर शोभायात्रा निकालने को लेकर ठाकुर और दलित समुदाय आपस में भीड़ गए जिसने हिंसा का रूप ले लिया। जिसमें एक दलित व्यक्ति की मौत हो गई और 16 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। जबकि 25 दलितों के घरों को आग लगा दी गई।

सहारनपुर के शब्बीरपुर और शिमलाना गांव में रहने वाले राजपूत और दलित समुदाय के लोगों के बीच लड़ाई हुई। शब्बीरपुर दलित और शिमलाना ठाकुर बहुल इलाका है। हालाँकि स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले भी दोनों समुदायों के बीच छोटी-छोटी लड़ाईयां होती रही हैं, पर इस तरह से उग्र होकर खूनी संघर्ष पहली बार हुआ है।

पुलिस के मुताबिक, शिमलाना में महाराणा प्रताप की याद में कार्यक्रम रखा गया था। शब्बीरपुर में रहने वाले ठाकुर उसमें हिस्सा लेने के लिए जा रहे थे। आरोप है कि वो लोग तेज आवाज में गाने बजाते हुए जा रहे थे। इसपर शब्बीरपुर के मुखिया शिव कुमार ने उन लोगों को आवाज धीमी करने को कहा जिसपर दोनों की लड़ाई हो गई। इस पर ठाकुर समुदाय के लोगों ने कथित रूप से गांव से लोगों को बुला दिया। पहले 300 और फिर 2000 के करीब ठाकुर समाज के लोग शब्बीरपुर पहुंच गए। जिसके बाद झगड़ा बढ़ा और 25 घरों को फूंक दिया गया। ठाकुरों पर पुलिस के वाहनों और आग बुझाने वाली गाड़ी का रास्ता रोकने का भी आरोप है।

इसके पहले, 20 अप्रैल को सहारनपुर सड़क दूधली गांव में आंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में निकली शोभायात्रा के दौरान भी दो गुटों में जमकर पत्थरबाज़ी, आगज़नी, फायरिंग व लूटपाट हुई थी। इस मामले में स्थानीय सांसद राघव लखनपाल शर्मा समेत करीब 400 लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किय गया था। यह शोभायात्रा प्रशासन की इजाज़त के बिना निकाली गई थी।

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में अभी तक छह मुकदमे दर्ज हुए हैं और पुलिस ने 17 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। मृतक के पिता की तहरीर पर ग्राम प्रधान सहित सात लोगों के ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने इस तहरीर के आधार पर ग्राम प्रधान शिवकुमार सहित सात लोगों के ख़िलाफ़ रिपोर्ट दर्ज की है।