सहायिका न रहे से सेविका के परेशानी

bihar mahilaजिला सीतामढ़ी, प्रखण्ड डुमरा ,गांव विश्वनाथपुर वार्ड नम्बर छौ। उहां बिना साहायिका के आंगनबाड़ी  केन्द्र चल रहल हई। ई केन्द्र 2007 में खुललई। जेकर केन्द्र संख्या छौ हई ई केन्द्र नगर पश्चिम में परई छई।
गांव के लोग फूलकुमारी देवी , सोनी कुमारी लगभग दस बारह लोग कहलथिन कि एई केन्द्र पर सब दिन बच्चा सब पढ़े अवई छई। सेविका अपने से घरे घरे जाके बच्चा सब के बुलाके लबई छथिन। पढ़बई छथिन अउर खिचड़ी भी उ अपने बनबई छथिन। रिर्चा कुमारी, मनिषा कुमारी, पुरूषोतम कुमार, गोलु लगभग सताइस छबीस बच्चा सब कहलई कि हम सब रोज पढ़े अबइले। जेई दिन छुट्टी रहई छई ओई दिन न अवई छी। खाना भी मिलइय, चैकलेट, विस्कूट भी देई छथिन, ड्रेस भी मिलल हय। वार्ड पषिर्द करूणा सिंह कहलथिन कि साहायिका के लेल आवेदन देल छथिन। सेविका ललिता देवी कहलथिन कि हम त केन्द्र भी चलबइले, बच्चा के भी बुला के लबईले अउर पोषाहार भी अपने से बनबइले। एकरा बाद बी. एलो के काम पल्स पोलियो में भी डिउटी देले छथिन त कि करू हम त कहइले कि पोलियो में से नाम हटा दू। लेकिन कहां कोई सुनई छथिन। सहायिका के पता न कहिया बहाली होतई। आवेदन त पहिलके सी. डी. पी. ओ. रहथिन तबे गेल हई। अब कथी करू जे काम हई उ त करबे करइले। सहायिका के भी काम हम अपने करइले। कुल नामाकन चालीस उइ उपस्थिति तीस,अठाइस, पैतिस भी हो जाई छई। किशोरी बच्ची, गर्वबती महिला, धात्री महिला के भी चावल दाल देई छी। सहायिका न रहे से हमरा बहुत परेसानी हई।
बाल विकास परियोजना के बड़ा बाबू कहलथिन कि इ बात त सही हई। जहिया से केन्द्र खुललई तहिया से सहायिका न हई। । लेकिन उहां पर सहायिका के चयन हो गेल हई। प्रशिक्षण अभी न भेल हई, मगर अब होजतई।